लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक क्षमता को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में रक्षा लेखा विभाग, क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, लखनऊ के 40 अधिकारियों को साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि भौतिक दुनिया से निकलकर अपराध अब डिजिटल दुनिया में पैर पसार चुका है। तकनीक के इस दौर में यदि हम सतर्क नहीं रहे, तो कभी भी साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज जिसके पास जितना अधिक डेटा है, वह उतना ही शक्तिशाली है। दुनिया के कई देश सिर्फ इसलिए ताकतवर हैं, क्योंकि वे अपनी तकनीक और डेटा किसी से साझा नहीं करते।
डीएनए और एआई लैब में देखीं फॉरेंसिक की बारीकियां
लिस उप महानिरीक्षक हेमराज मीना ने अधिकारियों को साइबर फॉरेंसिक के बढ़ते महत्व से रूबरू कराया। इन अफसरों ने संस्थान की अत्याधुनिक डीएनए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब का भी भ्रमण किया, जहां उन्होंने देखा कि कैसे आधुनिक तकनीक और फॉरेंसिक साइंस मिलकर पेचीदा मामलों को सुलझाते हैं।
डॉ. इंद्रजीत ने साइबर सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं पर विशेष व्याख्यान दिया और जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने संचालन किया। वहीं, उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस विशेष सत्र के दौरान संस्थान के उप निदेशक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. आनंद प्रकाश, अमित मिश्र, राहुल द्विवेदी, डॉ. पलक, शैलेन्द्र सिंह और कार्तिकेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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