सहरसा
जिले में पंचायतों के परिसीमन की नई प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। इस बार पंचायतों की सीमाओं का निर्धारण राजस्व गांवों तथा वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। परिसीमन के दौरान प्रत्येक पंचायत की आबादी, राजस्व गांवों की स्थिति और भौगोलिक संतुलन को ध्यान में रखा जाएगा।
इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद जिले की संबंधित प्रखंड में पंचायतों की सीमाओं का निर्धारण उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र से शुरू होकर दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र तक किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि परिसीमन के दौरान किसी भी गांव का अनावश्यक विभाजन न हो।
सीओ मौनी बहन ने बताया कि आबादी या प्रशासनिक जरूरतों के कारण आवश्यक होने पर गांवों का विभाजन किया जाएगा। नई पंचायतों की सीमाएं तय करते समय प्राकृतिक और स्थायी सीमाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
नदी, रेलवे लाइन, नहर, प्रमुख सड़क और अन्य सार्वजनिक पहचान वाले स्थलों को सीमा निर्धारण का आधार बनाया जाएगा। इससे भविष्य में सीमा विवाद की संभावना कम होने की उम्मीद है।
गांव के नाम पर होगा पंचायत का नाम
नई पंचायतों का नाम भी सामान्यतः उसी गांव के नाम पर रखा जाएगा, जहां सबसे अधिक जनसंख्या होगी। प्रशासन का मानना है कि इस प्रक्रिया से पंचायतों का संचालन अधिक व्यवस्थित होगा और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, सामान्य स्थिति में पंचायत मुख्यालय उस गांव में बनाया जाएगा, जहां सबसे अधिक आबादी निवास करती है।
वहीं, यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की संयुक्त आबादी 50 प्रतिशत से अधिक होगी तो मुख्यालय उसी वर्ग की सर्वाधिक आबादी वाले गांव में स्थापित किया जाएगा।

More Stories
रांची एचईसी परिसर में हटेगा अतिक्रमण, 1200 करोड़ की जमीन पर कब्जा
लखनऊ अमीनाबाद में नकली दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़, पांच पर मुकदमा दर्ज
झारखंड के 600 सरकारी स्कूलों में एआई आधारित स्मार्ट क्लासेज जल्द शुरू होंगी