August 7, 2026

होशियारपुर को मिली पहली महिला मेयर, प्रवीण सैनी के नाम पर लगी मुहर

होशियारपुर.

होशियारपुर नगर निगम को पहली बार महिला मेयर मिल गई हैं। शुक्रवार को आयोजित चुनाव में 6 बार पार्षद रह चुकी प्रवीण सैनी को नगर निगम का नया मेयर चुन लिया गया। वहीं पूर्व मेयर सुरिंदर शिंदा को सीनियर डिप्टी मेयर और संदीप चेची को डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी सौंपी गई।

चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही नगर निगम में नए नेतृत्व की औपचारिक शुरुआत हो गई। शुक्रवार सुबह ग्यारह बजे नगर निगम के सभी निर्वाचित पार्षदों ने शपथ ग्रहण की। इसके बाद पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त कैबिनेट मंत्री डॉ. बलवीर सिंह की अध्यक्षता में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रवीण सैनी के नाम पर मेयर पद की मुहर लग गई।

6 बार बन चुकी पार्षद
प्रवीण सैनी लंबे समय से नगर निगम की राजनीति में सक्रिय हैं। वह लगातार छह बार पार्षद चुनी जा चुकी हैं। पिछले कार्यकाल में उन्होंने सीनियर डिप्टी मेयर के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी। अब उन्हें नगर निगम की पहली महिला मेयर बनने का अवसर मिला है। वहीं पिछले कार्यकाल में मेयर रहे सुरिंदर शिंदा को इस बार सीनियर डिप्टी मेयर बनाया गया, जबकि संदीप चेची को डिप्टी मेयर चुना गया। हालांकि मेयर और अन्य पदों पर नियुक्ति के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा भी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व के फैसले से कुछ पार्षद संतुष्ट नहीं हैं। कई पार्षदों ने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि फैसले में सभी की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

पार्टी के लिए संगठनात्मक चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि असंतोष समय रहते दूर नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में पार्टी के लिए संगठनात्मक चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से नाराजगी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नगर निगम में नई टीम के गठन के साथ अब लोगों की नजर शहर के विकास कार्यों पर रहेगी। नई मेयर प्रवीण सैनी के सामने शहर की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने, लंबित विकास परियोजनाओं को गति देने और नगर निगम की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। वहीं पार्टी के भीतर उभर रही नाराजगी को संभालना भी नए नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती माना जा रहा है।