August 11, 2026

हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे शिवालय, बारिश में भी भक्ति की बयार

लखनऊ
 
सावन की शिवरात्रि पर मंगलवार को पूरा उत्तर प्रदेश शिवमय हो उठा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिवालयों से लेकर पूर्वांचल की काशी और रामनगरी अयोध्या तक, हर मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें और होठों पर ‘बम-बम भोले’ का जयघोष देखने को मिला। भोर से ही शिव भक्त गंगाजल और बेलपत्र लेकर मंदिरों के द्वार पर पहुंचने लगे थे। योगी सरकार ने मंदिरों के बाहर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम कर रखे थे। सुगम जलाभिषेक के लिए पुलिस-प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी। कुछ जिलों में लगातार बरसते मेघों का भी भक्तों के उत्साह पर असर नहीं पड़ा। मानो प्रकृति स्वयं भोलेनाथ के अभिषेक में भागीदार बन गई हो। इस शुभ दिन लोगों ने मंदिरों व घरों में रुद्राभिषेक किया। 

हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंजती रही काशी

श्रावण माह के सोमवार से श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब मंगलवार को सावन की शिवरात्रि तक बना रहा। काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ के दरबार में लाखों शिवभक्तों और कांवड़ियों ने पहुंचकर जलाभिषेक किया और आशीर्वाद लिया। सुगम दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी और पुलिस ने कांवड़ मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक चाक-चौबंद सुरक्षा बनाए रखी। काशी के मृत्युंजय महादेव मंदिर, श्री तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर, मार्कंडेय महादेव मंदिर, गौरी केदारेश्वर मंदिर और शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य सभी शिवालयों में भी सुरक्षा और सुविधा के विशेष इंतजाम किए गए। पूरी काशी हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंजती रही। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं में दर्शन-जलाभिषेक को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिला।
राम की नगरी अयोध्या में बम-बम भोले का जयघोष

रामनगरी अयोध्या भी सावन की शिवरात्रि पर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठी। शिवालयों के साथ-साथ रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने पहले पवित्र सरयू में स्नान किया, फिर भगवान श्रीराम के पुत्र कुश द्वारा स्थापित बताए जाने वाले प्राचीन नागेश्वरनाथ मंदिर पहुंचकर भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में भी दर्शनार्थियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। बैरिकेडिंग, पुलिस बल की तैनाती और चरणबद्ध प्रवेश व्यवस्था के बीच रामनगरी के अन्य शिवालयों में भी भक्तों ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।

भीड़ नियंत्रण को मंदिरो के बाहर कड़ा सुरक्षा घेरा

मेरठ के ऐतिहासिक औघड़नाथ मंदिर में तड़के चार बजे से ही कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के अनुमान के बीच प्रशासन ने त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया। 400 पुलिसकर्मियों के साथ एटीएस, बम और डॉग स्क्वॉड तथा ड्रोन से लगातार निगरानी की गई। बागपत के प्रसिद्ध पुरा महादेव मंदिर में तेज बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह बरकरार रहा। गाजियाबाद के प्राचीन दूधेश्वर नाथ मंदिर में रात 12 बजे से ही जलाभिषेक की शुरुआत हो गई थी। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर से आधा किलोमीटर पहले ही वाहनों का प्रवेश रोककर यातायात डायवर्जन लागू कर दिया गया गया।

डाक कांवड़ियों के लिए विशेष मार्ग, गांव-गांव पहुंची शिव भक्ति

मुरादाबाद में भोर चार बजे से ही सिद्धपीठ चौरासी घंटा, झारखंडी शिव मंदिर, महाकालेश्वर धाम और ऋणमुक्तेश्वर महादेव (बुद्धि विहार) में कांवड़ियों और स्थानीय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अकेले चौरासी घंटा मंदिर में 10 हजार से अधिक भक्तों ने जलाभिषेक किया, जहां भव्य महाआरती में भी श्रद्धालु शामिल हुए। सहारनपुर में हरिद्वार से गंगाजल लेकर हरियाणा-पंजाब जाने वाले मुख्य मार्गों शिवभक्त ही दिखाई देते रहे। डाक कांवड़ियों के लिए विशेष मार्ग बनाया गया। मुजफ्फरनगर और शामली के शिवालयों में में भी दिन भर भक्तों की कतार रही।

विधिवत निभाई गई रात्रि प्रहर में पूजा की परंपरा

प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर, ब्रह्मेश्वर महादेव, सोमेश्वर महादेव और पड़िला महादेव मंदिरों में भी शिव भक्तों का तांता लगा रहा। मनकामेश्वर मंदिर के व्यवस्थापक श्री धरानंद ब्रह्मचारी बताते हैं कि सावन के पूरे महीने में महादेव की पूजा, जलाभिषेक और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है, लेकिन सावन में पड़ने वाली शिवरात्रि का महत्व सबसे अधिक है। इस दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर भगवान शिव की आराधना करते हैं। रात्रि के चार प्रहरों में शिवजी की पूजा करने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही श्रद्धा से निभाई जा रही है।