रांची
टीडीपीएल के गिरफ्तार मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने सीआइडी को बताया है कि रांची के हरिओम टावर में फ्लैट लेकर अभ्यर्थियों से उत्तर लिखवाने की व्यवस्था की गई थी। बयान में आरोप है कि कुछ एजेंट दूसरे राज्यों से लोगों को बुलाकर अभ्यर्थियों से उत्तर लिखवाते थे।
जिन अभ्यर्थियों के उत्तर अपेक्षाकृत बेहतर थे, उनके अंक बढ़ाने के लिए कुछ प्रोफेसरों से संपर्क किए जाने का भी दावा किया गया है। अभय के कथित बयान के अनुसार, एसीएफ और एफआरओ परीक्षा में अपने अभ्यर्थियों की मेंस परीक्षा के उत्तर लिखवाने और अंक बढ़वाने के लिए उसने करीब 40 लाख रुपये दिए थे।
सीडीपीओ परीक्षा में भी टीडीपीएल के माध्यम से अभ्यर्थी उपलब्ध कराने और प्रति अभ्यर्थी करीब 10 लाख रुपये का रेट होने का दावा किया गया है। अभय तिवारी के कथित बयान में टीडीपीएल के रामवीर सिंह और सतपाल सिंह का एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के आवास पर आने-जाने का भी उल्लेख है।
बयान के अनुसार, इन्हीं लोगों से उसने कथित तौर पर सुना था कि 14वीं जेपीएससी में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने तीन अभ्यर्थियों की मदद कराई गई थी। हालांकि, उसने उन अभ्यर्थियों के नाम जानने से इनकार किया। सीआइडी इस बयान का भी सत्यापन कर रही है।
टीडीपीएल के निदेशक रामवीर ने बताया, खाली गोलों को सही उत्तर में बदला
टीडीपीएल के गिरफ्तार निदेशक रामवीर सिंह ने सीआईडी को बताया कि खाली छोड़े गए गोलों को सही उत्तर में बदला गया था। उसने अपनी स्वीकारोक्ति बयान में ओएमआर स्कैनिंग, ओएमआर में हेरफेर, मेरिट अंकों से जुड़े डेटा में बदलाव, ओएसएम, मेंस परीक्षा के अंकों और इंटरव्यू के लिए कोड जेनरेशन जैसी प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ी की जानकारी होने का दावा किया गया है।
बयान के अनुसार, श्वेता गुप्ता को एसीएफ और एफआरओ के साक्षात्कार तथा 14वीं जेपीएससी परीक्षा के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। रामवीर के कथित बयान में यह भी दावा है कि कुछ परीक्षाओं की आंसर-की मूल्यांकन शुरू होने से पहले ही संबंधित कर्मचारियों के साथ साझा की गई थी, ताकि ओएमआर और ओएसएम में कथित मैनिपुलेशन की जा सके।
रामवीर ने जांच में कथित तौर पर बताया कि अभय कुमार तिवारी के माध्यम से दिए गए अभ्यर्थियों के रोल नंबर के आधार पर ओएमआर शीट में खाली छोड़े गए प्रश्नों के उत्तर बाद में सही तरीके से अंकित किए जाते थे। इसके बाद उनके अंक बढ़ाकर चयन कराने का दावा किया गया है।
कथित बयान के अनुसार, एफआरओ की प्रारंभिक परीक्षा के बाद अभय तिवारी, धर्मेंद्र (मुख्य सचिव के आवास का कंप्यूटर आपरेटर) और आनंद ने करीब 15 अभ्यर्थियों की सूची दी थी। इन अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में सही उत्तर अंकित कर उन्हें सफल कराने की बात कही गई थी।
बदले में चयन होने पर प्रति अभ्यर्थी आठ से दस लाख रुपये तक देने की बात सामने आने का दावा किया गया है। एसीएफ और एफआरओ की मुख्य परीक्षा में भी कथित सेटिंग का आरोप लगाया गया है। बयान में कहा गया है कि कुछ अभ्यर्थियों से रांची और हजारीबाग के अलग-अलग स्थानों पर लिखित परीक्षा की तैयारी या उत्तर लिखवाने की व्यवस्था कराई गई।
अभय तिवारी की ओर से 40 से 50 अभ्यर्थियों के रोल नंबर चयन के लिए दिए जाने और इसके एवज में करीब 1.10 करोड़ रुपये अलग-अलग किस्तों में नकद देने का भी दावा किया गया है।

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