भोपाल
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि बाल देखरेख संस्थाओं से निकलने वाले बच्चे और केयर लीवर्स केवल परिस्थितियों के शिकार नहीं, बल्कि अपने भविष्य के निर्माता हैं। सरकार का प्रयास है कि कोई भी बच्चा संरक्षण की व्यवस्था से बाहर निकलने के बाद स्वयं को अकेला न समझे, बल्कि शिक्षा, कौशल, रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता के अवसरों के साथ समाज की मुख्यधारा में अपनी पहचान बनाए। उन्होंने कहा कि “संघर्ष चाहे जितना बड़ा हो, सफलता उससे बड़ी हो सकती है।”
मंत्री भूरिया आज भोपाल स्थित राज्य होटल प्रबंधन संस्थान में मिशन वात्सल्य के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कैटलिस्ट्स फॉर सोशल एक्शन (CSA) के सहयोग से आयोजित बाल देखरेख संस्थाओं के बच्चों एवं केयर लीवर्स की एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।
मंत्री भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश के केयर लीवर्स अपनी मेहनत और प्रतिभा से प्रदेश ही नहीं, देश और विदेश में भी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेना की वर्दी में अपने बच्चों को देखकर गर्व की अनुभूति होती है। इन युवाओं की उपलब्धियां बताती हैं कि अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर परिस्थितियां किसी की सफलता की राह नहीं रोक सकतीं।
“नौकरी पाने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें युवा”
मंत्री भूरिया ने युवाओं से एकजुट रहने और अपने साथियों की मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस युवा को रोजगार का अवसर मिले, वह अपने अन्य साथियों को भी आगे बढ़ाने में सहयोग करे। “आपको रोजगार मिले, यह अच्छी बात है, लेकिन इससे भी बेहतर होगा कि आप स्वयं दूसरों को रोजगार देने की स्थिति में पहुंचें।
मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना का बढ़ रहा है दायरा
मंत्री भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के माध्यम से बाल देखरेख संस्थाओं से बाहर आने वाले बच्चों और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। योजना को और सरल बनाने तथा उसका दायरा बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे और युवा इसका लाभ प्राप्त कर सकें तथा उन्हें शिक्षा, कौशल, रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भर जीवन के लिए आवश्यक सहयोग मिल सके। उन्होंने कहा कि मिशन वात्सल्य के माध्यम से शासन की प्रतिबद्धता है कि कोई भी बच्चा केवल संरक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि उसे सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता का पूरा अधिकार मिले।
सफल केयर लीवर्स ने साझा किए संघर्ष से सफलता तक के अनुभव
कार्यशाला में बच्चों एवं केयर लीवर्स ने मंत्री भूरिया से कैरियर, मानसिक स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार एवं जीवन कौशल जैसे विषयों पर संवाद किया और मार्गदर्शन प्राप्त किया। बाल देखरेख संस्थाओं से निकलकर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों का सम्मान भी किया गया।
कार्यशाला में सफल केयर लीवर्स ने अपने संघर्ष से सफलता तक के अनुभव साझा किए। उनके अनुभवों ने उपस्थित बच्चों और युवाओं को यह संदेश दिया कि जीवन की शुरुआती परिस्थितियां भविष्य का निर्धारण नहीं करतीं, बल्कि मेहनत, आत्मविश्वास और सही अवसर सफलता की नई राह खोलते हैं।
सफलता की कहानियों के पीछे संघर्ष की गाथा
इस अवसर पर केयर लीवर्स की सफलता की कहानियों पर आधारित कॉफी टेबल बुक का भी लोकार्पण किया गया। मंत्री भूरिया ने कहा कि यह पुस्तक केवल सफलता की कहानियों का संकलन नहीं है, बल्कि प्रत्येक कहानी के पीछे छिपे संघर्ष, मेहनत और लक्ष्य प्राप्ति के दृढ़ संकल्प की गाथा है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं की उपलब्धियां दूसरे बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।
बच्चों के हुनर को बाजार से जोड़ने पर जोर
कार्यशाला में बच्चों द्वारा तैयार किए गए जूट बैग, कलाकृतियों और अन्य उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। मंत्री भूरिया ने बच्चों के हुनर की सराहना करते हुए इन उत्पादों को बाजार से जोड़ने तथा स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल कौशल का प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके हुनर को बाजार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम होना चाहिए।
कार्यशाला में औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं विभिन्न संस्थाओं के साथ इंटर्नशिप और रोजगार के अवसरों को लेकर भी संवाद हुआ। कैरियर मार्गदर्शन, भविष्य की कार्ययोजना, मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक आवश्यकताओं पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।
सीएसए के साथ विभागीय समन्वय की सराहना
मंत्री भूरिया ने आफ्टर केयर सेवाओं के क्षेत्र में CSA द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग और CSA के बेहतर समन्वय से केयर लीवर्स के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं। उन्होंने CSA की CEO स्मिता शेट्टी और एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्वेता मोदी सहित पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वे अपने विभागीय दौरों में केयर लीवर्स से संवाद करती हैं और उनमें आगे बढ़ने तथा अपने लक्ष्य हासिल करने की ऊर्जा और उत्साह देखकर प्रसन्नता होती है।
युवाओं के सशक्त भविष्य के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मंत्री भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “विकसित भारत” के संकल्प में हर बच्चे की सुरक्षा, हर युवा का सशक्तिकरण और प्रत्येक नागरिक को आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना शामिल है। मध्यप्रदेश सरकार महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से केयर लीवर्स के मार्गदर्शन, सहयोग और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के निर्वहन और बच्चों एवं युवाओं के सपनों को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने युवाओं से अपने सपनों को सीमित नहीं करने, प्रयास जारी रखने और आत्मविश्वास को कभी कमजोर न पड़ने देने का आह्वान किया।
महिला एवं बाल विकास आयुक्त निधि निवेदिता ने कहा कि आफ्टर केयर केवल आर्थिक सहायता तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाने की एक सतत प्रक्रिया है। बाल देखरेख संस्थाओं से बाहर आने वाले युवाओं को शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन कौशल के क्षेत्र में निरंतर सहयोग उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केयर लीवर्स की सफलता की कहानियां दूसरे बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा का माध्यम बन रही हैं। आयुक्त निधि निवेदिता ने कहा कि बच्चों को संरक्षण देने के साथ उन्हें निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर देना हमारी प्राथमिकता है।
सीएसए की एनुअल रिपोर्ट का भी विमोचन किया। इस अवसर पर सीएसए के श्री दीपेश चौकसे ने केयर लीवर बच्चों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

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