रांची
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी सीजीएल परीक्षा के जरिए विभिन्न श्रेणियों में नियुक्त हुए 1,932 कर्मियों के लिए कानूनी लड़ाई का रास्ता साफ होता दिख रहा है। परीक्षा और नियुक्तियों पर मंडराते खतरे के बीच अब इन चयनित कर्मियों की ओर से आज उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की संभावना है।
अब तक इन कर्मियों की ओर से औपचारिक रूप से याचिका दाखिल नहीं किए जाने के कारण ही सीजीएल परीक्षा और इससे जुड़ी नियुक्तियों को पूरी तरह रद किए जाने के सरकारी या प्रशासनिक फैसलों पर कोई प्रभावी रोक नहीं लग पाई है।
जानकारों का मानना है कि जब तक प्रभावित पक्ष खुद अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाता, तब तक न्याय पाने या प्रक्रिया पर स्टे लगाने की स्थिति मजबूत नहीं होती। गुरुवार को हाई कोर्ट ने तीन याचिकाओं पर सकारात्मक फैसला दिया था।
पूर्व के मामलों से मिल रही है कानूनी मजबूती
झारखंड उच्च न्यायालय का पूर्व का रुख इन कर्मियों के लिए एक बड़ी उम्मीद बना हुआ है। गुरुवार को भी जब विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को रद करने के विवादित आदेश सामने आए, तब अदालत में याचिकाएं दाखिल होने के बाद कोर्ट ने उन आदेशों पर तुरंत रोक लगा दी। कोर्ट ने सरकार के फैसले को न्याय के नियम के विरुद्ध बताया और सीआईडी रिपोर्ट पेश करने को कहा।
इसी कानूनी दृष्टांत को आधार बनाते हुए अब सीजीएल कर्मी भी अपनी नौकरी बचाने के लिए अदालत की शरण लेने जा रहे हैं। दूसरी ओर सीजीएल अभ्यर्थी रांची से जाने को तैयार नहीं हैं। प्रोजेक्ट भवन के बाहर जमे हैं।
1,932 कर्मियों के भविष्य पर टिकी निगाहें
इस पूरी प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से राज्यभर में विभिन्न श्रेणियों के कुल 1,932 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। ये सभी कर्मी फिलहाल अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन परीक्षा से जुड़े विवादों और अनिश्चितता के माहौल ने उनकी नींद उड़ा दी है। यदि समय रहते अदालती मोर्चे पर कानूनी सुरक्षा नहीं मिली, तो इन डेढ़ हजार से अधिक युवाओं का भविष्य अधर में लटक सकता है।
JSSC CGL के सफल अभ्यर्थियों ने निकाली तिरंगा यात्रा
जेएसएससी-सीजीएल पास अभ्यर्थियों ने गुरुवार शाम को नियुक्ति रद के विरोध में तिरंगा यात्रा निकाली। तिरंगा यात्रा मोरहाबादी मैदान के गांधी प्रतिमा से निकलकर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंची। इस दौरान रास्ते में लंबा जाम लग गया। यात्रा में शामिल अभ्यर्थियों ने नियुक्ति रद करने का फैसला तुरंत वापस लेने की मांग की।
अभ्यर्थी न्याय दो या फांसी दो का नारा लगा रहे थे। सैकड़ों अभ्यर्थी अल्बर्ट एक्का चौक पर काफी देर तक जमे रहे। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों की कड़ी मेहनत और मेरिट के आधार पर चयनित हुए हैं।
कई अभ्यर्थी विभागों में नियमित रूप से अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं। ऐसे में पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करना सरासर गलत है। उन्होंने मांग की कि यदि कहीं गड़बड़ी हुई है, तो केवल दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
निर्दोष चयनित कर्मियों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए। अभ्यर्थियों ने साफ किया कि जब तक सरकार यह फैसला वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इन अभ्यर्थियों को आंदोलन करने के लिए अभी तक कोई धरना स्थल नहीं दिया गया है। वहीं प्रशासन की ओर से कुटे मैदान धरना के लिए एलाट किया गया था, जिसे अभ्यर्थियों ने मना कर दिया। इनका कहना है कि प्रोजेक्ट भवन के सामने ही कुछ लोग रात में धरने पर बैठेंगे।

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