August 23, 2026

रंधावा का हाईकमान को संदेश- चन्नी जैसा CM चाहिए! बोले- SC, मैं जट्ट सिख, आशू ब्राह्मण; अनुभव और सोशल इंजीनियरिंग का बैलेंस

लुधियाना

पंजाब कांग्रेस में जारी कलह के बीच चरणजीत सिंह चन्नी खेमे ने उन्हें सीएम फेस बनाने की डिमांड फिर तेज कर दी है। इसे लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने हाईकमान को लुधियाना से डायरेक्ट मैसेज दिया।

रंधावा ने कहा कि उन्हें चरणजीत सिंह चन्नी जैसा CM ही चाहिए, जिसने चार महीने में ही सीएम रहते बेहतरीन काम किया और पंजाब के लोग आज भी उन्हें याद करते हैं। रंधावा ने आगे कहा कि चन्नी के पास एक्सपीरियंस भी है और सोशल इंजीनियरिंग का बैलेंस भी।

इससे पहले चन्नी गुट के नेता लगातार सोशल मीडिया पर चरणजीत सिंह चन्नी के 111 दिन की सरकार की उपलब्धियां गिनाकर उन्हें सीएम फेस बनाने की डिमांड कर चुके हैं।

उधर, खुद चन्नी हाईकमान को अपने बयानों से असमंजस में डाल रहे हैं। शनिवार को उन्होंने सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताने वाले कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड़ा को जुबान संभालकर बात करने को कह दिया है। चन्नी के इस बयान से कांग्रेस हाईकमान को भी असमंजस में डाल दिया।

    'मंत्रियों के घर बैठकर चलाई सरकार': लुधियाना में मीडिया से बात करते हुए सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि चरणजीत सिंह चन्नी हमेशा से एक्टिव रहे। पंजाब के पहले ऐसे चीफ मिनिस्टर हैं, जिनको अगर मंत्रियों के घर जाकर काम करवाना पड़ा तो वो गए। पंजाब को अब भगवंत मान जैसा झूठा चीफ मिनिस्टर नहीं चाहिए, बल्कि चन्नी जैसा काम करने वाला मुख्यमंत्री चाहिए।

    हमारे पास एक्सीरिएंस: रंधावा का कहना है कि हमारे पास एक्सपीरिएंस है। चरणजीत सिंह चन्नी ने 111 दिन की शानदार सरकार चलाई है। उन 111 दिनों में लिए गए फैसलों को लोग आज भी याद करते हैं। उन्होंने कहा कि चन्नी के पास मुख्यमंत्री का अनुभव है। मेरे पास भी मंत्री और डिप्टी सीएम का पद रहा जबकि आशू भी मंत्री रहे हैं। ऐसे हमारे पास कई लीडर हैं जिन्होंने पिछली सरकारों में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।

    हम तीन नेता, तीन बड़े वर्ग: चन्नी और भारत भूषण आशू की मौजूदगी में रंधावा ने कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पूरी तरह से स्टैंड कर रही है। यहां तीन बड़े नेता खड़े हैं कि एक चीफ मिनिस्टर, एक डिप्टी चीफ मिनिस्टर और एक मिनिस्टर रह चुका। रंधावा ने कहा कि चन्नी एससी लीडर, मैं जट्ट सिख और आशू ब्राह्मण लीडर । तीनों यहीं पर हैं। अब आप ही बताओ, हम 2027 के लिए हम मजबूती से स्टैंड कर रहे हैं या नहीं?

    स्टोरेज और फसलों के मुद्दे पर अफसरों की क्लास: रंधावा ने कहा कि मैं फूड स्टैंडिंग कमेटी का मेंबर हूं। जिस दिन यह कमेटी पंजाब आएगी, उसी दिन पंजाब सरकार के अफसरों से सीधे सवाल किए जाएंगे। राइस मिलर्स और आढ़तियों के सामने चीफ मिनिस्टर से जवाब-तलबी की जाएगी कि राज्य में अनाज स्टोरेज को लेकर क्या हालात बने हुए हैं।

2027 के लिए चन्नी गुट की सोशल इंजीनियरिंग

चन्नी खेमा 111 दिन की सरकार के अनुभव के साथ दलित, जट्ट सिख और शहरी हिंदू/ब्राह्मण वोटों को साधने का संदेश दे रहा है। रंधावा का बयान सीधे कांग्रेस हाईकमान के लिए संकेत है कि 2027 में पंजाब का चुनाव स्थानीय चेहरे, खासकर चरणजीत सिंह चन्नी को आगे रखकर लड़ा जाए। केंद्रीय नेताओं पर चन्नी के तीखे तेवर और पार्टी की गुटबाजी हाईकमान के लिए चुनौती हैं, लेकिन लुधियाना में एकजुटता दिखाकर चन्नी गुट ने अपनी दावेदारी साफ कर दी है।

    चन्नी ने सज्जन कुमार पर क्या कहा: पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार को लेकर कांग्रेस के भीतर ही तीखा मोर्चा खोल दिया। चन्नी ने उन्हें ‘सिखों का कातिल’, ‘पंजाब का दुश्मन’ और ‘गद्दार’ बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सिखों को टायर डालकर जिंदा जलाया गया, ऐसे व्यक्ति को तो सरेआम गोली मार देनी चाहिए थी। चन्नी ने हरियाणा से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्‌डा के सज्जन कुमार को ‘रोल मॉडल’ बताए जाने पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा कहने वालों को संभलकर बोलना चाहिए।

    पार्टी लाइन से अलग जाकर हाईकमान को घेरा: राजनीतिक एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा के मुताबिक, चन्नी का बयान सिर्फ सज्जन कुमार पर हमला नहीं, बल्कि कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक लाइन पर भी सवाल है। कांग्रेस लंबे समय से 1984 के दंगों को लेकर रक्षात्मक रही है। ऐसे में चन्नी का पार्टी के भीतर से ही इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठाना हाईकमान के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। एक्सपर्ट के अनुसार, यह बयान गांधी परिवार की पुरानी भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े करता है और चन्नी के हाईकमान के खिलाफ बढ़ते तेवरों का संकेत देता है।

    ‘हाईकमान की कमजोर नस पकड़ ली’: राजनीतिक विश्लेषक प्रमोद बातिश के अनुसार, चन्नी ने ऐसे मुद्दे को छेड़ा है, जिस पर कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर हमेशा सावधानी बरतती रही है। उनका कहना है कि चन्नी के तेवरों से हाईकमान से नाराजगी साफ दिखाई देती है। 1984 के दंगों का मुद्दा पंजाब में भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील है और इसे खुलकर उठाकर चन्नी ने पार्टी नेतृत्व को राजनीतिक रूप से असहज स्थिति में ला दिया है।