September 16, 2026

रांची जमीन म्यूटेशन केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एकल पीठ का आदेश किया रद्द

 रांची
 झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने रांची के नामकुम अंचल स्थित 5.13 एकड़ जमीन के म्यूटेशन से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए एकल पीठ के आदेश को रद कर दिया।

खंडपीठ ने रॉबर्ट एंथनी बारला की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए 15 अक्टूबर 2025 के फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें एकल पीठ ने उपायुक्त, भूमि सुधार उप-समाहर्ता और अंचल अधिकारी के म्यूटेशन के आदेशों को रद कर दिया गया था। खंडपीठ ने निजी प्रतिवादियों को संबंधित जमीन को लेकर लंबित टाइटल सूट में अपना दावा रखने की छूट दी है।

मामला रांची के मौजा-गुंडू, थाना-हटिया की खाता संख्या 16 की जमीन से संबंधित है। कुल 26.53 एकड़ जमीन वर्ष 1944 में विरोनिका तिर्की ने रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से खरीदी थी। इसमें से 8.80 एकड़ जमीन रोमन कैथोलिक मिशन को दान कर दी गई।

विरोनिका तिर्की की वर्ष 1983 में मृत्यु के बाद उनके चार पुत्रों ने शेष 17.73 एकड़ जमीन का पारिवारिक बंटवारा कर लिया। इसमें 5.13 एकड़ जमीन जॉन फ्रांसिस कुजूर के हिस्से में आई। जॉन फ्रांसिस कुजूर की मृत्यु के बाद वर्ष 1992 में उक्त जमीन का सक्सेशन म्यूटेशन उनकी पत्नी डॉ. लुईसा बारला कुजूर के नाम हुआ। उनके नाम म्यूटेशन को रद कराने के लिए जान के भाइयों ने जमाबंदी केस दायर किया था, जिसे वर्ष 2007 में खारिज कर दिया गया।

डॉ. लुईसा बारला कुजूर की मृत्यु के बाद उनके कथित दत्तक पुत्र राबर्ट एंथनी बारला ने जमीन के लिए सक्सेशन म्यूटेशन का आवेदन दिया। नामकुम के अंचल अधिकारी ने 16 जनवरी 2017 को म्यूटेशन उनके नाम कर दिया। इसके खिलाफ अपील और रिवीजन भी खारिज हो गई। निजी प्रतिवादियों की ओर से दायर रिट याचिका पर एकल पीठ ने राजस्व अधिकारियों के तीनों आदेशों को रद कर दिया था।

अदालत ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि एकल पीठ ने इस तथ्य को गलत समझा कि राबर्ट बारला के पक्ष में म्यूटेशन ट्रांसफर के आधार पर किया गया था। जबकि म्यूटेशन आवेदन और संबंधित दस्तावेजों से स्पष्ट था कि आवेदन सक्सेशन म्यूटेशन के लिए किया गया था।

अदालत ने कहा कि म्यूटेशन केस में 16 जनवरी 2017 के आदेश में जमीन को बेचने और सेल डीड का उल्लेख होना टाइपिंग या अनजाने में हुई त्रुटि प्रतीत होती है। राजस्व कर्मचारी की रिपोर्ट में भी राबर्ट बारला को लुईसा बारला कुजूर का एकमात्र कानूनी उत्तराधिकारी और जमीन पर कब्जे में बताया गया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर अंचल अधिकारी ने म्यूटेशन किया था।