अलवर
बिजली के लिए अब अलवर की नजर आसमान पर है। सूरज की किरणें आने वाले समय में जिले की बिजली व्यवस्था की नई ताकत बनने जा रही हैं। सौर ऊर्जा का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और निर्माणाधीन परियोजनाएं पूरी होने के बाद अलवर में 250 मेगावाट तक सौर बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। यह उत्पादन क्षमता सूरतगढ़ थर्मल पावर की एक इकाई के बराबर होगी।
बता दें कि अभी जिले में सोलर प्लांटों से करीब 67 मेगावाट और रूफटॉप सोलर से करीब 29 मेगावाट बिजली मिल रही है। कुल 36 सोलर प्लांट चालू हैं, जबकि करीब 80 प्लांटों में काम जारी है। इनके पूरा होने के साथ सौर ऊर्जा का दायरा तेजी से बढ़ेगा और अलवर की बिजली व्यवस्था में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी मजबूत होगी।
जमीन से छत तक बन रहे बिजली घर
अलवर में सौर ऊर्जा का विस्तार अब सिर्फ बड़े प्लांटों तक सीमित नहीं है। खेतों और खाली जमीनों पर सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ घरों और संस्थानों की छतें भी छोटे बिजलीघरों में बदल रही हैं। जिले में अब तक करीब 6 हजार रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं। दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़ाकर 13 हजार करने का लक्ष्य है। इससे उपभोक्ता दिन में अपनी जरूरत की बिजली का एक हिस्सा खुद पैदा कर सकेंगे। रूफटॉप सोलर का बढ़ता नेटवर्क बिजली व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने में भी मदद करेगा।
दिन में सूरज संभालेगा बिजली का भार
सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के साथ बिजली आपूर्ति का तरीका भी बदलने की तैयारी है। दिन में सूरज की रोशनी के साथ सौर बिजली का उत्पादन बढ़ेगा और इसी दौरान इसका अधिकतम उपयोग किया जाएगा। इससे दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा करने में मदद मिलेगी। सूरज ढलने के बाद सौर उत्पादन घटेगा, तो बिजली की जरूरत दूसरे स्रोतों से पूरी करनी होगी। इस तरह आने वाले समय में अलवर की बिजली व्यवस्था में दिन का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा के भरोसे हो सकता है।
सोलर प्लांटों के प्रमुख फायदे
बिजली उत्पादन की लागत कम करने में मदद मिलती है।
ईंधन की जरूरत नहीं होती, इसलिए कोयला, डीजल या गैस पर निर्भरता घटती है।
प्रदूषण कम होता है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
नवीकरणीय ऊर्जा होने से लंबे समय तक बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकता है।
बिजली व्यवस्था पर दबाव कम होता है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा सकती है।
बिजली आयात/खरीद पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है।
बड़े प्लांटों के साथ रूफटॉप सोलर से स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ता है।
बिजली बिल में बचत की संभावना रहती है, खासकर रूफटॉप सोलर में।
सौर परियोजनाओं से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
खाली या कम उपयोग वाली जमीन पर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
ऊर्जा के स्रोतों में विविधता आने से बिजली व्यवस्था अधिक मजबूत होती है।
सोलर प्लांटों के प्रमुख नुकसान
शुरुआती निवेश अधिक होता है। जमीन, सोलर पैनल, इन्वर्टर और अन्य उपकरणों पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।
बड़े क्षेत्रफल की जरूरत होती है। बड़े सोलर प्लांट के लिए काफी जमीन चाहिए, जिससे कृषि या अन्य उपयोग वाली जमीन पर दबाव पड़ सकता है।
मौसम पर निर्भरता रहती है। बादल, बारिश और धूल के कारण बिजली उत्पादन घट जाता है।
रात में उत्पादन नहीं होता, इसलिए रात की बिजली के लिए अन्य स्रोतों या ऊर्जा भंडारण की जरूरत रहती है।
बैटरी भंडारण महंगा है। सौर बिजली को बड़े स्तर पर संगृहीत करने के लिए बैटरी की लागत बढ़ जाती है।
पैनलों की सफाई जरूरी है। धूल और मिट्टी जमने से पैनलों की क्षमता कम हो सकती है, खासकर राजस्थान जैसे धूल वाले क्षेत्रों में।
रखरखाव की लागत रहती है। पैनल, इन्वर्टर, तार और अन्य उपकरणों की समय-समय पर देखरेख करनी पड़ती है।
पुराने सोलर पैनलों का निस्तारण चुनौती बन सकता है। बड़ी संख्या में पैनल खराब या पुराने होने पर इनके पुनर्चक्रण की व्यवस्था जरूरी होती है।
प्राकृतिक आवास पर असर पड़ सकता है, यदि बड़े प्लांट संवेदनशील या जैव विविधता वाले क्षेत्रों में लगाए जाएं।
बिजली ग्रिड पर दबाव पड़ सकता है। उत्पादन अचानक बढ़ने-घटने पर ग्रिड को संतुलित रखने के लिए बेहतर व्यवस्था जरूरी होती है।
अलवर में सोलर प्लांटों से सभी लोगों को फायदा होगा। किसानों को दिन में बिजली मिलेगी। दिसंबर तक अधिकतर सोलर चालू हो जाएंगे।
-जेपी बैरवा, एसई, बिजली निगम, अलवर

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