October 3, 2026

इमरान मसूद की नियुक्ति पर रालोद का तंज, कहा-कांग्रेस-सपा गठबंधन में तनाव चरम पर

इमरान मसूद की नियुक्ति पर रालोद का तंज, कहा-कांग्रेस-सपा गठबंधन में तनाव चरम पर

‘150 से कम सीटों पर नहीं मानेगी कांग्रेस’, रोहित अग्रवाल ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर किया दावा

रालोद का दावा-सपा के सामने गठबंधन बचाने और अंदरूनी असंतोष से निपटने की चुनौती

कांग्रेस-सपा की गठबंधन वाली रस्सी में तनाव! रोहित अग्रवाल ने पूछा -अब टूटने की बारी किसकी?

इमरान मसूद के बयानों पर रालोद का सवाल-किसके इशारे पर बोल रहे थे?

‘एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई’, रोहित अग्रवाल ने सपा की सियासी स्थिति पर कसा तंज 

इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर रालोद का तंज, बोले-कांग्रेस-सपा गठबंधन में तनाव चरम पर

लखनऊ, 
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के द्वारा इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान का दावा करते हुए कहा कि दोनों दलों के गठबंधन में तनाव चरम पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने आत्मसम्मान से समझौता करने को तैयार नहीं है और 150 से कम सीटों पर मानने को तैयार नहीं है।

सपा कार्यकर्ताओं में सीट शेयरिंग को लेकर असंतोष
रोहित अग्रवाल ने इमरान मसूद के बयान को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यह देखना होगा कि वह किसके इशारे पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी में लंबे समय से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे कार्यकर्ता भी कांग्रेस के साथ गठबंधन की जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, सपा के कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई खास राजनीतिक अस्तित्व नहीं है और उसके साथ सीटों का समझौता करने की जरूरत नहीं है।

सपा के सामने एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई
रालोद प्रवक्ता ने कांग्रेस और सपा के बीच मौजूदा स्थिति को गठबंधन की रस्सी में बढ़ते तनाव जैसा बताते हुए कहा कि अब देखना होगा कि पहले समाजवादी पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता है या दोनों दलों के गठबंधन में दरार आती है। उन्होंने सपा के सामने इसे एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई जैसी स्थिति बताया।

सपा-कांग्रेस में सत्ता को लेकर खींचतान
रोहित अग्रवाल ने 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि दोनों दलों के बीच आपसी तनाव और असमंजस को देखते हुए जनता उनके राजनीतिक इरादों को समझ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों के बीच सत्ता को लेकर खींचतान है और जनता की सेवा उनके एजेंडे में प्राथमिकता पर नहीं है।