रांची
खनन राजस्व एवं सेस की वसूली में झारखंड के कुछ जिलों का प्रदर्शन बहुत ही बेहतर रहा है और इनमें धनबाद अव्वल दिख रहा है। सेस के माध्यम से खान एवं भूतत्व विभाग प्रथम पांच महीनों (अप्रैल से अगस्त तक) में 4657.01 करोड़ रुपये राजस्व वसूल चुका है। वित्तीय वर्ष के छह महीने बीतने के बावजूद अभी इन महीनों की रिपोर्ट समेकित नहीं हो सकी है।
विगत पांच महीनों में झारखंड के खजाने में 9,877 करोड़ रुपये से अधिक आ चुके हैं। झारखंड सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक राज्य को खनिज रायल्टी, उपकर और अन्य शुल्कों से कुल 9877.89 करोड़ रुपये की आय हुई है। यह लक्ष्य का 36.59 प्रतिशत है।
2700 करोड़ रुपये वसूलने का है लक्ष्य
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का वार्षिक राजस्व लक्ष्य 2700.00 करोड़ रुपये निर्धारित है। अगस्त 2026 तक कुल 21879.99 करोड़ रुपये का खनिज उत्पादन और उठाव दर्ज किया गया है जिसके ऊपर 98,77.89 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया।
इसके अलावा झारखंड मिनरल बेस्ड लैंड सेस के माध्यम से भी सरकार के खजाने में 4657.01 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से पेश संशोधित बिल में इस सेस की वसूली पर रोक लगा दी गई है।
खनन गतिविधियों से होने वाली आय में सबसे बड़ा योगदान धनबाद जिले का रहा है। अन्य जिलों का प्रदर्शन कुछ कमजोर रहा है। कुछ जिलों से सेस से प्राप्त राजस्व सरकार के लिए निराशाजनक रहा है। राजस्व के हिसाब से धनबाद के बाद चतरा का नाम है। कुछ जिलों की स्थित बहुत ही खराब है। अगले छह महीनों में जोर नहीं दिया गया तो राजस्व की स्थिति कमजोर हो सकती है।
जेएमबीएल (झारखंड मिनरल बेस्ड लैंड) सेस वसूली का जिलेवार प्रदर्शन
– धनबाद : 689.70 करोड़ रुपये
– चतरा : 568.34 करोड़ रुपये
– चाईबासा : 586.70 करोड़ रुपये
– पश्चिमी सिंहभूम : 457.77 करोड़ रुपये
– रामगढ़ : 301.33 करोड़ रुपये
– बोकारो : 302.21 करोड़ रुपये

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