रियाद
सऊदी अरब ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 10 अक्टूबर को हुए घातक हमले का कड़ा जवाब देने की कसम खाई है। इस हमले में 12 लोग मारे गए और 309 अन्य घायल हो गए थे। यह हमला यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब के हवाई अड्डों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर चलाए जा रहे सैन्य अभियान का हिस्सा है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यमन में लड़ाई तेज हो रही है और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि सऊदी अरब हूती विद्रोहियों के हमलों का किस तरह से जवाब दे सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि हूती विद्रोही अपनी रणनीति के तहत सऊदी अरब को चौतरफा घेर रहे हैं। उनकी रणनीति सऊदी अरब के रणनीतिक बुनियादी ढांचों पर हमला कर दबाव बढ़ाने की है। हूती विद्रोही नागरिक जीवन को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह रणनीति कुछ ऐसी ही है, जैसे ईरान ने अमेरिका के खिलाफ अपनाई थी। ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डों की मेजबानी करने वाले देशों के एयरपोर्ट, तेल के कुओं और स्टोरेज फैसिलिटी को निशाना बनाया। इसका सीधा असर अमेरिका पर पड़ा और उसे दबाव में ईरान के साथ बैकचैनल बातचीत के लिए राजी होना पड़ा है।
हूतियों को रोकने में सऊदी अरब नाकाम
सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे महंगे एयर डिफेंस सिस्टम हैं। हालांकि, ईरान और हूती विद्रोहियों ने यह साबित कर दिया है कि वे न केवल सऊदी अरब में बल्कि खाड़ी देशों और हां तक कि इजरायल के एयर डिफेंस को भेदकर हमला करने में सक्षम हैं। इसका प्रमुख कारण हूती विद्रोहियों के हथियारों के जखीरे में बड़ी संख्या में मिसाइलों की मौजूदगी है। इन मिसाइलों को अब स्थानीय स्तर पर ही बनाया जा रहा है। इससे हूतियों को हथियारों के लिए ईरान से आने वाली सप्लाई पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। इससे हूती विद्रोही अपने सैन्य अभियान को बड़े पैमाने पर और बिना किसी बाधा के अंजाम दे रहे हैं।
हूतियों के खिलाफ कैसे कार्रवाई कर सकता है सऊदी अरब?
सऊदी अरब की तुलना में हूथियों के पास खोने के लिए कम है। उनके पास रणनीतिक बुनियादी ढांचा बहुत कम है। रियाद 2015 से ही उनसे लड़ रहा है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन यमन की राजधानी सना और हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में मिसाइल लॉन्च पैड्स, ड्रोन डिपो और कमांड सेंटरों पर हवाई हमले तेज कर सकता है। इसके अलावा सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेना को आधुनिक हथियार और फंडिंग देकर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के तटीय क्षेत्रों को हूतियों के कब्जे से छुड़ाने के लिए बड़ा जमीनी अभियान चला सकता है।
अमेरिका-पाकिस्तान-तुर्की देंगे सऊदी का साथ?
हूती विद्रोहियों के हमलों में अमेरिकी नागरिकों की मौत के बाद सऊदी अरब अपनी रक्षा के लिए अन्य देशों से समर्थन जुटा रहा है। ऐसी संभावना है कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमलों में अमेरिका भी शामिल हो जाए। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की जैसे साझेदार देशों के साथ मिलकर रक्षा समझौते के तहत रणनीतिक व तकनीकी मदद ले सकता है। इसके अलावा वह लाल सागर और अरब सागर में समुद्री गश्त बढ़ाकर ईरान से हूतियों तक पहुंचने वाले ड्रोन, मिसाइल और घातक हथियारों की तस्करी के रास्तों को पूरी तरह सील कर सकता है।

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