October 14, 2026

बस्तर में मुआवजे को लेकर भड़के बाढ़ प्रभावित किसान, सर्वे टीम को लौटाया

बकावंड.

बस्तर जिले के बकावंड जनपद के धोबीगुड़ा गांव में बाढ़ प्रभावित किसानों का गुस्सा अब राहत राशि के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है. सरकार की ओर से घोषित 8 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए किसानों ने राजस्व सर्वे टीम को बिना मुआयना किए वापस लौटा दिया.

किसानों का कहना है कि हालिया बाढ़ में धान सहित दूसरी फसलें बर्बाद हो गई हैं और अब अगली खेती तथा परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा है. इंद्रावती नदी के आसपास के धोबीगुड़ा, मालगांव, गुमडेल, कोरपाल, कानापाल, उलनार, कारितगांव और बजावंड जैसे गांवों में फसल नुकसान की शिकायतें सामने आई हैं. प्रभावित किसानों के मुताबिक, एक एकड़ में करीब 21 क्विंटल धान की उपज होती है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 65 हजार रुपये बैठती है. उनका कहना है कि बीज, खाद, दवा, जुताई और मजदूरी सहित खेती की लागत ही करीब 30 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है. ऐसे में पूरी फसल नष्ट होने के बाद घोषित सहायता राशि को किसान अपनी वास्तविक क्षति की तुलना में बेहद कम मान रहे हैं.

किसानों की मांग है कि खेतों में हुए नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाए और उसी के अनुरूप मुआवजा तय किया जाए. ग्राम पंचायत धोबीगुड़ा के सरपंच संतोष कश्यप ने किसानों को समझाइश देते हुए उनकी मांग जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने की पहल की है. उन्होंने प्रभावित किसानों से सांसद महेश कश्यप से मिलकर सामूहिक रूप से अपनी बात रखने की अपील की है. अब प्रशासन के सामने किसानों की आपत्तियों का समाधान करने, नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराने और राहत को लेकर भरोसा बहाल करने की चुनौती है.