पटना
बिहार चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (MGB) दोनों में सबसे बड़े दोनों दलों के बीच ही सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पा रही है, इसलिए सहयोगी दल भी परेशान हैं। एनडीए की सीट शेयरिंग पर सहमति बनाने की कोशिश में गुरुवार को पटना में गृह मंत्री अमित शाह और सीएम नीतीश कुमार के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बड़े नेताओं की मौजूदगी में चर्चा हुई। इस बीच महागठबंधन के सबसे बड़े वामंपथी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी लेनिनिवादी (CPI-ML) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस को नसीहत दी है कि वो औकात से ज्यादा सीट ना मांगे और इसकी चिंता करे कि भले सीटें कम लड़नी पड़े, लेकिन कैसे ज्यादा जीती जाए।
भाकपा-माले के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस द्वारा 2020 की तरह फिर 70 सीटों की मांग को लेकर चल रही चर्चाओं पर कहा- “कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा लगभग 70 सीटों की मांग की खबरें मैंने देखी हैं। लेकिन पिछली बार वो 70 सीटों पर लड़े और जीत सिर्फ सीट 19 ही पाए। 2015 में कांग्रेस 40 सीट लड़ी और 27 जीती थी। वो अच्छा स्ट्राइक रेट था। लेकिन 2020 में वो 70 सीट लड़ी… जो उनकी औकात (लड़ने की क्षमता) से ज्यादा थी। इसलिए मुझे लगता है कि इन सबके बीच संतुलन होना चाहिए।”
याद दिला दें कि 2020 के चुनाव में मात्र 12 सीटों के अंतर से तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनने से चूक गए थे। राजद के कई नेता इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेवार मानते हैं जो 70 सीटों पर लड़ी लेकिन सिर्फ 19 जीतकर आई। सीपीआई-माले मात्र 19 सीट लड़ी और 12 जीत गई। राजद ने 144 लड़कर 75 सीट निकाली थी। उस चुनाव में कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 27 फीसदी रहा, जबकि राजद का 52 परसेंट, सीपीआई-माले का 63 परसेंट, सीपीएम का 50 परसेंट और सीपीआई का 33 फीसदी रहा था।

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