चंडीगढ़
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 21 साल से लंबित एक महत्वपूर्ण विवाद का निपटारा करते हुए हरियाणा सिविल सेवा के 4 चयनित उम्मीदवार शक्ति सिंह, कुलदीप मलिक, सुभाष तायल और दीपक कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा इनकी नियुक्ति रोकने के सभी आधारों को अमान्य ठहराते हुए कहा कि चयन और सिफारिश के बाद उम्मीदवारों को दागी मानकर नियुक्ति न देना उचित नहीं है।
दरअसल इन चारों अधिकारियों का चयन हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा 24 जनवरी 2004 के विज्ञापन के आधार पर आयोजित परीक्षा में हुआ था। आयोग ने उन्हें योग्य पाकर औपचारिक रूप से राज्य सरकार को नियुक्ति के लिए भेज दिया था, लेकिन 2004 के विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू होने से प्रक्रिया रुक गई। बाद में सरकार ने इन्हें नियुक्ति देने से इन्कार कर दिया, जिससे मामला अदालत पहुंचा।
हाईकोर्ट के इस निर्णय से इन सभी को अब पुरानी तारीख से नियुक्ति, सांकेतिक वरिष्ठता, और परिणामी सेवा लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले इसी मामले में उम्मीदवार सुरेंद्र लाठर के पक्ष में भी समान फैसला दिया गया था। कोर्ट के इस आदेश ने 2 दशक से अधिक समय से जारी न्यायिक संघर्ष का अंत कर दिया है।

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