नई दिल्ली
साल 2026 से निजी और सरकारी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों के लिए सैलरी का कैलकुलेशन बदलने वाला है। सरकार ने 28 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं। इसमें सबसे चर्चित है '50% वेतन नियम' (50% Wage Rule)। आइए समझते हैं कि इसका आपकी जेब और भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?
क्या है 50% सैलरी का फॉर्मूला?
नए नियमों के मुताबिक आपकी कुल सैलरी (CTC) में 'मूल वेतन' (Basic Pay) और 'महंगाई भत्ता' (DA) का हिस्सा कम से कम 50% होना चाहिए। बाकी के 50% में HRA, बोनस और अन्य भत्ते आएंगे।
उदाहरण के तौर पर
अगर किसी की सैलरी 50,000 रुपये है और उसकी बेसिक सैलरी अभी सिर्फ 15,000 रुपये है, तो कंपनी को इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये (कुल सैलरी का 50%) करना होगा।
PF और ग्रेच्युटी में होगा बड़ा फायदा
PF और ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन बेसिक सैलरी के आधार पर होती है, इसलिए बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका पीएफ योगदान भी बढ़ जाएगा। इससे आपको रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फंड (PF और ग्रेच्युटी) काफी बड़ा हो जाएगा। इसके अलावा पेंशन और अन्य लाभों का दायरा भी बढ़ेगा।
इन-हैंड सैलरी और टैक्स पर क्या होगा असर?
जहाँ एक तरफ भविष्य सुरक्षित होगा, वहीं महीने के अंत में घर ले जाने वाली सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है क्योंकि पीएफ की कटौती ज्यादा होगी। चार्टर्ड अकाउंटेंट के अनुसार बेसिक सैलरी बढ़ने से टैक्स छूट वाले भत्तों का हिस्सा कम हो सकता है, जिससे कुछ कर्मचारियों की टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी चाहें तो 15,000 रुपये की वैधानिक सीमा पर ही पीएफ कटवाना जारी रख सकते हैं, जिससे इन-हैंड सैलरी पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

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