रांची.
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सीआईएसएफ असिस्टेंट कमांडेंट नियुक्ति नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। कोर्ट यह निर्देश दिया कि असिस्टेंट कमांडेंट की विज्ञापन के आधार पर नियुक्ति इस केस के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगी।
इसकी जानकारी अभ्यर्थियों को भी दे दी जाए। प्रार्थी ने कहा कि नियमावली के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान ही यूपीएससी ने असिस्टेंट कमांडेंट पद के लिए विज्ञापन निकाला है, इसलिए इस पर रोक लगाई जाए। प्रार्थी ने सीआईएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट नियुक्ति नियमवाली को चुनौती देते हुए कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेंनिंग की गाइडलाइन के तहत हर पांच साल में इस नियुक्ति नियमावली की समीक्षा होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
प्रार्थी का यह भी कहना था कि सीआईएसएफ के अन्य विंग में असिस्टेंट कमांडेंट के शत प्रतिशत पद इंस्पेक्टर पद से प्रोन्नति के माध्यम से भरे जाते हैं। जबकि उक्त नियमावली के तहत केवल 30 प्रतिशत पद ही इंस्पेक्टर पद से असिस्टेंट कमांडेंट पद पर प्रोन्नति देने का प्रविधान है। इसलिए वर्ष 2009 की नियुक्ति नियमावली और असंवैधानिक और गलत है।

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