April 13, 2026

नीतीश सरकार ने आचार नियमावली बदली, बिना अनुमति सोशल मीडिया पर रोक

पटना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के आचरण को और अधिक अनुशासित एवं जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 में संशोधन करते हुए नई बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली, 2026 लागू कर दी है। यह नियमावली राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी और इसका विस्तार पूरे राज्य में होगा। संशोधित नियमावली के तहत सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स के उपयोग को लेकर कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। अब कोई भी सरकारी सेवक, चाहे अपने नाम से हो या छद्म नाम से, बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर सकेगा।

कर्मचारियों को शालीन भाषा का प्रयोग करना होगा
बिहार सरकार की ओर से प्रकाशित गजट में स्पष्ट कहा गया कि सरकारी ई-मेल या मोबाइल नंबर का उपयोग निजी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या संचालित करने के लिए प्रतिबंधित रहेगा। कोई भी कर्मचारी या अधिकारी ऐसा कोई भी कंटेंट पोस्ट नहीं करेंगे, जिससे सरकार की छवि को ठेस पहुंचे। कर्मचारियों को शालीन भाषा का प्रयोग करना होगा। भड़काऊ या अश्लील सामग्री से बचें और इसे पोस्ट न करें।

बातचीत को सार्वजनिक करने पर भी रोक लगाई गई है
सरकार की ओर से स्पष्ट कहा गया कि है कि सरकारी सेवक सोशल मीडिया पर किसी भी राजनीतिक दल, व्यक्तियों, मीडिया संस्थानों या कानूनी मामलों का समर्थन या आलोचना नहीं करेंगे। इसके अलावा, सरकारी नीतियों, योजनाओं या न्यायालयों के फैसलों पर व्यक्तिगत राय व्यक्त करना भी वर्जित होगा। नियमावली के तहत गोपनीय या संवेदनशील जानकारी साझा करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, कार्यस्थल से जुड़े वीडियो, रील्स या लाइव प्रसारण करने और किसी शिकायतकर्ता के साथ बातचीत को सार्वजनिक करने पर भी रोक लगाई गई है।

अन्य माध्यमों से आय अर्जित नहीं कर सकेंगे
नियम में यह भी कहा गया कि सरकारी कर्मचारी अब किसी भी प्रकार की कोचिंग, वेबिनार, लाइव प्रसारण या अन्य माध्यमों से आय अर्जित नहीं कर सकेंगे। व्यक्तिगत लाभ के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने, उत्पाद या सेवाओं के प्रचार-प्रसार में भाग लेने और अपने या परिचितों के हित साधने पर भी पाबंदी लगाई गई है। इसके अलावा, यौन उत्पीड़न पीड़ितों या किशोर अपराधियों की पहचान उजागर करने, जाति या धर्म के आधार पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने तथा सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अनुचित टिप्पणी करने पर भी सख्त रोक रहेगी।