पटना.
नीतीश कुमार की एक-एक गतिविधि राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बनती रही है। वह अनायस कोई बात आगे नहीं बढ़ाते। बिहार की राजनीति में इन दिनों वह पूरी सोची-समझी नीति के तहत लव-कुश समीकरण को आगे कर रहे। पिछले दिनों अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान जब वे चंपारण के इलाके में थे, तब वह लव-कुश पार्क गए थे।
उस समय सम्राट चौधरी भी बतौर उपमुख्यमंत्री उनके साथ थे। दोनों ने पार्क में अपनी तस्वीर भी करायी। वह अनायास ही नहीं था। यहां से भी लव-कुश समीकरण को आगे किए जाने का साफ संदेश था। नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान नियमित रूप से सम्राट चौधरी साथ में रहे। इस दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के बारे में कई बार कहा कि अब यही लोग आगे संभालेंगे। कई तरह से उन्होंने इशारे में यह साफ किया था कि सम्राट को वह अपना उत्तराधिकारी बनाने की चाहत रखते हैं। जिस समय नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा को लेकर सक्रिय थे, उस समय उनके एग्जिट प्लान पर विशेष चर्चा नहीं थी। बाद के चरण में जब वह निकले तो राज्यसभा के लिए उनका नाम तय हो गया था। उस समय भी सम्राट चौधरी के साथ उनकी यात्राएं हुईं। बाद में यह चर्चा हुई कि सम्राट चौधरी ही मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार की पसंद हैं। शपथ ग्रहण के दिन सम्राट चौधरी ने जिस तरह से नीतीश कुमार का लोकभवन में अभिवादन किया, उस पर लोगों ने गौर किया।
उपेंद्र कुशवाहा पर लगा चुके हैं दांव
लव-कुश समीकरण को लेकर नीतीश कुमार अपने आरंभिक दिनों से ही सक्रिय दिखते रहे हैं। आरंभिक दिनों में उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा को आगे किया था। उन्हीं की पहल पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर आए उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश कुमार ने नेता प्रतिपक्ष बनाया। बाद के दिनों में कुशवाहा समाज से आने वाले उमेश कुशवाहा को उन्होंने जदयू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। जदयू के एक राष्ट्रीय महासचिव भी कुशवाहा समाज से बनाए गए। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद शनिवार को नीतीश सबुह 10.30 बजे के करीब सम्राट चौधरी के सरकारी आवास पर पहुंच गए। उनके साथ नीतीश कुमार के विश्वस्त व उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी भी थे। यह भी अनायास नहीं था। जिस तरह से नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के साथ कई फ्रेम में तस्वीर करायी, उसमें उनका लव-कुश समीकरण स्पष्ट तौर पर झलक रहा था।

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