चंडीगढ़.
हरियाणा-पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में किसानों को फाने (गेहूं के फसल अवशेष) जलाने से रोकने के आदेश 'धुएं' में उड़ने लगे हैं। एक अप्रैल से अब तक पंजाब में 1759, हरियाणा में 1709, दिल्ली में 28, उत्तर प्रदेश में 13 हजार 378 और मध्य प्रदेश में 32 हजार 369 स्थानों पर गेहूं के फसल अवशेष जलाए जा चुके हैं।
शुक्रवार को ही पंजाब में 341, हरियाणा में 144, दिल्ली में छह, उत्तर प्रदेश में 70 और मध्य प्रदेश में 158 स्थानों पर फाने जलाने के मामले सामने आए। हरियाणा में वर्ष 2023 के मुकाबले इस बार फसल अवशेष जलाने के मामले सात गुणा बढ़ गए हैं। धान सहित अन्य फसलों की बुआई के लिए खेतों को खाली करने की आपाधापी में किसान फसल अवशेषों को आग लगा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जबकि फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर दो एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये तथा इससे ज्यादा जमीन पर 30 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। प्रदेश सरकार ने अब तक मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 552 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की है, जिससे यह किसान दो सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे। इन्हें सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिलेगा और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट रोक दी जाएगी।
फसल की कटाई के उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। फसल अवशेषों को जलाने से हवा में हानिकारक गैसें फैलती हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की संख्या कम हो जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।

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