रांची
ग्रामीण कार्य विभाग के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम से जुड़े टेंडर आवंटन में कमीशन घोटाला केस में ईडी अब मार्च महीने में चार्जशीटेड इंजीनियरों की भी चल-अचल संपत्ति जब्त करेगी। इनपर ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन के बदले में कमीशन वसूलने व उस राशि के बंटवारे में शामिल होने का आरोप है।
आरोपितों में सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर, कार्यपालक अभियंता व सहायक अभियंता स्तर के इंजीनियर शामिल हैं। पीएमएल अधिनियम के तहत जांच में ईडी ने जानकारी जुटाई है कि इंजीनियरों ने कमीशन की वसूली कर अपने से ऊपर के अधिकारियों व विभागीय मंत्री तक पहुंचाया।
ये टेंडर झारखंड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र व झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण से संबंधित थे, जिससे ये सभी इंजीनियर जुड़े हुए थे
ईडी ने इन 14 इंजीनियर, पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके आप्त सचिव संजीव लाल, पूर्व मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम सहित कुल 36 आरोपितों के विरुद्ध अब तक चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। एसीबी जमशेदपुर में 2019 में दर्ज कांड के आधार पर ईडी ने ईसीआइआर किया था।
पूरा मामला जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा की दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार होने से संबंधित था। इसके बाद एसीबी जमशेदपुर ने ही तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के ठिकाने से 2.67 करोड़ रुपये की नकदी की बरामदगी की थी।
ईडी ने उक्त केस में ईसीआइआर करने के बाद वीरेंद्र राम को गिरफ्तार किया और टेंडर आवंटन में कमीशन घोटाले के एक बड़े रैकेट का खुलासा किया। जांच के क्रम में तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम व उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल सहित अन्य आरोपित पकड़े गए थे।
पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल सहित कई आरोपित अब भी जेल में हैं। ईडी अब तक 44 करोड़ रुपये की संपत्ति व 38 करोड़ रुपये नकदी जब्त कर चुकी है। अब इंजीनियरों की संपत्ति जब्ती की तैयारी है।
ये हैं 14 इंजीनियर, जिनकी चल-अचल संपत्ति खंगाल रही है ईडी
सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार व प्रमोद कुमार, कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार व अनिल कुमार (सेवानिवृत्त), सहायक अभियंता राम पुकार राम व रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) और पूर्व अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता उमेश कुमार (सेवानिवृत्त)।
कमीशन की राशि से अर्जित की है संपत्ति
ईडी ने जांच में पाया है कि ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी इकाइयों में कमीशन व रिश्वत का एक संगठित गिरोह सक्रिय था। इसमें ठेका लेने वाले ठेकेदारों को कुल टेंडर मूल्य का तीन प्रतिशत कमीशन देना पड़ता था।
इस कमीशन का बंटवारा भी होता था, जिसमें 1.35 प्रतिशत राशि तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक उनके निजी सचिव संजीव लाल के माध्यम से जाता था। वहीं, 0.65 प्रतिशत से एक प्रतिशत राशि विभागीय सचिव व शेष राशि मुख्य इंजीनियरों तथा उनके नीचे के अभियंताओं तक पहुंचती थी।

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