इंदौर
राऊ-देवास बायपास पर अर्जुन बड़ौद ब्रिज के बाद रालामंडल के समीप बना ब्रिज भी ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है। दोनों ब्रिजों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है। दोनों ब्रिजों को बिना लोकार्पण के शुरू कर दिया गया है। रालामंडल ब्रिज डेढ़ माह पहले ट्रायल के लिए खोला था, लेकिन चार दिन बाद उसे फिर बंद कर दिया गया, क्योंकि ब्रिज का लोड टेस्ट नहीं हुआ था और रेलिंग के बाद कुछ गलत निर्माण भी हो गए थे। गलती समझ में आने पर बाद में अफसरों ने उसे तुड़वा दिया था। ब्रिज की दोनों भुजाएं ट्रैफिक के लिए बंद होने के कारण वाहन को सर्विस रोड से गुजरना पड़ रहा था। कई बार ट्रैफिक जाम के कारण वाहनों की कतार लग जाती थी।
राऊ से देवास के बीच 35 किलोमीटर के बायपास पर तीन जगह ब्रिजों का निर्माण चल रहा है। दो स्थानों पर ब्रिज ट्रैफिक के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन एमआर-10 जंक्शन पर बन रहे ट्रिपल लेयर ब्रिज के शुरू होने में छह माह से अधिक का समय और लगना है। यहां मध्य हिस्से को तो ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है, लेकिन अभी अंडरपास और फ्लायओवर का काम बाकी है।
इस ब्रिज के बनने से बायपास से इंदौर शहर में प्रवेश करने वाले वाहनों को आसानी होगी। अभी बोगदों से होकर वाहनों को आना पड़ता है, जबकि भारी वाहन तो बोगदों से आए ही नहीं पाते हैं। इस ब्रिज के बनने से शहर में एंट्री आसान होगी।रालामंडल ब्रिज ट्रैफिक के लिए तो खोल दिया गया, लेकिन ब्रिज पर बिजली के पोल नहीं लगाए गए हैं। यहां ट्रैफिक अंधेरे में ही चलेगा, जबकि बायपास के दूसरे ब्रिजों पर विद्युत पोल लगाए गए हैं।

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