चंडीगढ़
पंजाब में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों से पांच दिन पहले ईवीएम बनाम बैलेट पेपर विवाद तेज हो गया है। भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और पंजाब राज्य चुनाव आयोग अब इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। वीरवार को सुनवाई के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग ने पंजाब सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईवीएम की ट्रेनिंग और तैयारी के लिए 15 दिन का समय चाहिए। ईसीआई ने अदालत में कहा कि इसके लिए 15 मिनट पर्याप्त हैं।
सुनवाई के दौरान ईसीआई ने बताया कि चुनाव के लिए मांगी गई ईवीएम मशीनें राजस्थान से पंजाब के लिए रवाना कर दी गई हैं। मशीनों की कमी का मुद्दा अब नहीं रहा। आयोग ने कहा कि मशीनों की कमीशनिंग और अन्य तकनीकी प्रक्रिया एक दिन में पूरी की जा सकती है।
राजस्थान से सीधे पंजाब भेजी जा रहीं ईवीएम
ईसीआई ने अदालत को बताया कि 20 मई को पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र के बाद सभी तकनीकी आशंकाएं दूर हो चुकी हैं। पंजाब की ओर से मशीनें खुद उठाने में अनिच्छा जताने के बाद राजस्थान से मशीनें सीधे पंजाब भेजी जा रही हैं। आयोग ने कहा कि मशीनें फिलहाल ट्रांजिट में हैं और अब केवल यह तय करना बाकी है कि उन्हें किस स्थान पर पहुंचाना है तथा रिसीव करने के लिए कौन अधिकारी अधिकृत होगा।
आयोग ने यह भी कहा कि मशीनों को मोहाली तक पहुंचाने और फर्स्ट लेवल चेकिंग तथा कमीशनिंग प्रक्रिया में पूरा सहयोग दिया जाएगा। इससे पहले पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग अदालत में कह चुका है कि मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद उनकी जांच, तैयारी और तैनाती में 15 से 18 दिन लगेंगे। इसी आधार पर 27 मई को होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने का फैसला लिया गया था।
याचिका में बैलेट पेपर से चुनाव कराने के फैसले को चुनौती दी गई है। पंजाब के महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी ने अदालत में कहा कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होता है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

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