May 22, 2026

पहलगाम हमले की चार्जशीट में बड़ा खुलासा, सबसे पहले सलमान ने चलाई थी गोली

पहलगाम

पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट ने उस खौफनाक साजिश की परतें खोल दी हैं, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में सामने आया है कि पहलगाम घूमने आए निर्दोष पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. शुरुआती जांच में ही पता चल गया था कि इस वारदात को लश्कर-ए-तैयबा के संगठन TRF यानी द रजिस्टेंस फ्रंट ने अंजाम दिया. हमले के कुछ ही देर बाद TRF ने इसकी जिम्मेदारी ली थी, लेकिन बाद में उसने अपने बयान से पलटते हुए इसे फॉल्स नैरेटिव बता दिया। 

इस हमले की जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग के एडिशनल एसपी गुलाम हसन को सौंपी थी. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि हमले को तीन आतंकियों ने मिलकर अंजाम दिया था. इनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी शामिल थे. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस पूरे हमले के मास्टरमाइंड का नाम भी सामने आया. जांच एजेंसियों ने बताया कि इस हमले की साजिश सज्जाद जट्ट उर्फ अली भाई ने रची थी, जो लंबे समय से आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था। 

हमले के तुरंत बाद घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया और पुलिस व फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल को अपने कब्जे में ले लिया. पूरे इलाके की घेराबंदी की गई और सबूत जुटाने का काम शुरू हुआ. मौके से हथियारों से जुड़े अहम सुराग, कारतूसों के खोखे और अन्य फॉरेंसिक सबूत बरामद किए गए. इसके साथ ही मृतकों के परिवार वालों और घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए. शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया था कि हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था। 

30 अप्रैल को NIA ने पूरे इलाके में बड़े स्तर पर ग्रिड सर्च ऑपरेशन चलाया. इस अभियान में NIA, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स, सुरक्षा बलों और एंटी-सैबोटाज टीमों को शामिल किया गया. पूरे जंगल और आसपास के इलाकों को खंगाला गया. जांच एजेंसियों ने हर संभावित जगह से सबूत जुटाने की कोशिश की. इसके बाद CBI से उस लोकेशन की 3D मैपिंग कराई गई, जिसकी रिपोर्ट 7 मई को NIA को सौंप दी गई. इस मैपिंग से आतंकियों की मूवमेंट और हमले के एंगल को समझने में मदद मिली। 

जांच के दौरान NIA ने स्थानीय लोगों से भी बड़े पैमाने पर पूछताछ की. दुकानदारों, पोनी वालों, ढोक में रहने वाले लोगों और टैक्सी ड्राइवरों समेत कुल 1,113 लोगों से सवाल-जवाब किए गए. यही पूछताछ बाद में जांच की सबसे अहम कड़ी साबित हुई. एक अज्ञात गवाह ने एजेंसी को बताया कि हमले से एक दिन पहले उसने बशीर अहमद जोठाड़ को तीन हथियारबंद लोगों के साथ देखा था. गवाह के मुताबिक, बशीर उन तीनों को परवेज के ढोक यानी झोपड़ी में लेकर गया था। 

गवाह ने आगे बताया कि 22 मई की सुबह जब वह बैसरन पार्क गया, तब उसने वहां बशीर और परवेज दोनों को देखा था. कुछ घंटों बाद ही बैसरन में गोलीबारी की खबर आ गई. इसी गवाह ने जांच एजेंसियों को यह भी बताया कि बाद में आतंकियों ने उसे भी पकड़ लिया था और उससे कलमा पढ़ने को कहा था. जब उसने कलमा पढ़ दिया, तब जाकर आतंकियों ने उसे छोड़ा. इस बयान ने जांच एजेंसियों को यह यकीन दिलाया कि हमलावर धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बना रहे थे। 

गवाह से मिली जानकारी के बाद NIA ने कई जगहों पर छापेमारी की. जांच में कुछ और अहम सबूत हाथ लगे, जिसके बाद 22 जून को पोनी वाले बशीर अहमद और परवेज अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के दौरान परवेज अहमद ने उस रात की पूरी कहानी जांच एजेंसियों को बताई. उसने कहा कि 21 अप्रैल की शाम करीब 5 बजे वह अपनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ ढोक में चाय पीने की तैयारी कर रहा था, तभी उसका मामा बशीर वहां पहुंचा और सबको चुप रहने के लिए कहा। 

कुछ देर बाद बशीर बाहर गया और फिर तीन हथियारबंद लोगों के साथ लौटा. तीनों के हाथों में बंदूकें थीं और वे बेहद थके हुए लग रहे थे. उन्होंने पानी मांगा और अंदर बैठ गए. परवेज ने बताया कि उन लोगों ने कहा कि वे लंबा सफर तय करके आए हैं. इसके बाद उन्होंने अल्लाह के रास्ते में लड़ने वालों की मदद करने पर सवाब मिलने की बात कही. परवेज के मुताबिक, वे लगातार जिहाद और कश्मीर की आजादी की बातें कर रहे थे। 

परवेज ने बताया कि उसकी पत्नी ताहिरा ने उन आतंकियों के लिए खाना बनाया था. खाना खाते समय आतंकी अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों की आवाजाही और इलाके में तैनाती के बारे में सवाल पूछ रहे थे. परवेज ने जांच एजेंसियों को बताया कि आतंकी उर्दू बोल रहे थे, लेकिन उनकी बोली में पंजाबी लहजा साफ महसूस हो रहा था. आपस में भी वे पंजाबी में ही बात कर रहे थे. परवेज की पत्नी ताहिरा ने भी जांच के दौरान यही बयान दिया। 

जांच एजेंसियों ने बाद में बशीर अहमद जोठाड़ से भी पूछताछ की. उसने बताया कि हमले से एक दिन पहले वह अपने घोड़े को देखने जंगल की तरफ गया था. तभी अचानक पेड़ों के पीछे से तीन हथियारबंद लोग उसके सामने आ गए. उनके हाथों में बंदूकें थीं. उन्होंने बशीर से कहा कि उन्हें किसी सुरक्षित जगह पर ले जाया जाए और खाने का इंतजाम किया जाए. बशीर ने बताया कि उसे तुरंत समझ आ गया था कि वे मुजाहिद हैं। 

बशीर ने जांच एजेंसियों को बताया कि आतंकियों ने अपने बैग और पाउच उसे छिपाने के लिए दिए थे. बाद में उन सामानों को परवेज ने कंबलों के नीचे छिपा दिया था. तीनों आतंकी करीब पांच घंटे तक ढोक में रुके रहे. रात करीब 10 बजे वे एक-एक करके वहां से निकल गए. जाते समय छोटे कद वाले आतंकी ने परवेज को 3000 रुपये भी दिए. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह रकम मदद के बदले दी गई थी। 

दोनों आरोपियों से पूछताछ में कई अहम राज सामने आए. इसके बाद 28 जून को बशीर अहमद के ढोक, परवेज अहमद के ढोक और बैसरन मार्गूजा इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया. जांच एजेंसियों ने वहां से कई संदिग्ध चीजें बरामद कीं. हालांकि पूछताछ के दौरान NIA को लगा कि दोनों कुछ अहम बातें छिपा रहे हैं. इसी वजह से 9 जुलाई को एजेंसी ने दोनों का नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति मांगी, लेकिन 29 अगस्त को कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी। 

चार्जशीट में हमले के तरीके का भी बेहद डरावना खुलासा हुआ है. गवाहों के मुताबिक, तीनों आतंकी हथियारों के साथ ब्रेडांगन की तरफ से बैसरन पार्क पहुंचे थे. पार्क में दाखिल होने से पहले वे एक पेड़ के नीचे बैठे और खाना खाया. इसके बाद उन्होंने अपने बैग से कंबल निकाले और खुद को ढक लिया. फिर दो आतंकी पार्क के अंदर हालात देखने गए और कुछ देर बाद वापस लौट आए. इसके बाद तीनों ने अपना सामान एक जगह छोड़ा और हमले की पोजिशन लेने आगे बढ़ गए। 

चार्जशीट के मुताबिक, दो आतंकी पार्क के मेन गेट और ढाबों की तरफ बढ़े, जबकि तीसरा आतंकी जिपलाइन वाले हिस्से की तरफ चला गया. उन्होंने ऐसी जगहें चुनीं, जहां से पूरे पार्क को चारों तरफ से निशाना बनाया जा सके. हबीब ताहिर और हमजा अफगानी ढाबों के पास आम लोगों की तरह बैठ गए, जबकि उनमें से एक आतंकी हथियार के साथ पीछे छिपकर निगरानी करता रहा. दूसरी ओर सुलेमान जिपलाइन वाले हिस्से में पहुंच गया, जहां बाद में कारतूसों के खोखे भी मिले थे। 

गवाहों ने बताया कि आतंकियों ने लोगों से पहले उनका धर्म पूछा. वे हर शख्स से पूछ रहे थे कि वह हिंदू है या मुसलमान. कई लोगों से कलमा पढ़ने को कहा गया. जो लोग कलमा नहीं पढ़ पाए या जिन्होंने खुद को मुसलमान नहीं बताया, उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी गई. इस दौरान आतंकी बार-बार कहते रहे- मोदी को बोलो. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह हमला सिर्फ हत्या नहीं बल्कि एक सुनियोजित आतंकी संदेश भी था। 

चार्जशीट के मुताबिक, दोपहर 2 बजकर 23 मिनट पर पहली गोली जिपलाइन वाले हिस्से से सुलेमान ने अपनी M-4 कार्बाइन से चलाई. इसके तुरंत बाद बाकी दोनों आतंकियों ने AK-47 से फायरिंग शुरू कर दी. जिपलाइन और ढाबों की तरफ से हुई गोलीबारी ने पार्क के बीचों-बीच मौजूद मैदान को मौत के मैदान में बदल दिया. चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. हमलावर लगातार गोलियां बरसाते रहे। 

जांच में यह भी सामने आया कि हमला करने के बाद भागते समय आतंकियों ने एक गवाह को रोका और उससे फिर कलमा पढ़ने को कहा. जब उसने कलमा पढ़ दिया तो उसे छोड़ दिया गया. बाद में जांच एजेंसियों को पार्क से बाहर निकलने वाले रास्ते पर चार और खाली कारतूस मिले. एजेंसियों का मानना है कि ये फायरिंग आतंकियों ने हमला करने के बाद खुशी मनाने के लिए की थी. चार्जशीट में कहा गया है कि इससे साफ साबित होता है कि आतंकियों को अपने किए पर जरा सा भी पछतावा नहीं था।