लखनऊ
यूपी एसटीएफ (UPSTF) ने ओवरलोड ट्रकों को अवैध तरीके से पास कराने वाले एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस रैकेट में परिवहन विभाग और खनन विभाग के कई अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि बालू और मौरंग से लदे ओवरलोड ट्रकों को बिना चेकिंग के यूपी में चलाने के लिए दलाल एक ट्रक से 7000 रुपये वसूलते थे। इसमें से 5000 रुपये सीधे आरटीओ और खनन विभाग के अफसरों तक पहुंचते थे।
कई जिलों में छापेमारी, एफआईआर दर्ज
UPSTF ने लखनऊ, फतेहपुर, उन्नाव और रायबरेली में एक साथ छापेमारी की। जांच के बाद एआरटीओ, पीटीओ और खनन अधिकारियों समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। लखनऊ के मड़ियांव थाने में एआरटीओ राजू बंसल, पीटीओ मनोज भारद्वाज समेत 9 लोगों पर मुकदमा दर्ज। फतेहपुर के खनन अधिकारी देशराज पटेल सहित 6 लोगों पर एफआईआर। रायबरेली, एआरटीओ पुष्पांजली और एक अन्य आरोपी को नामजद किया गया है। वहीं, उन्नाव के शहर कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में अफसरों के साथ उनके गनर और ड्राइवरों के नाम भी शामिल हैं, जो इस अवैध वसूली में भूमिका निभा रहे थे।
ऐसे चलता था वसूली का खेल
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि बांदा-हमीरपुर से लेकर लखनऊ तक ओवरलोड ट्रकों को पास कराने का पूरा नेटवर्क चल रहा था। दलाल रात में ही अधिकारियों को ट्रक नंबर और वसूली गई रकम की जानकारी भेज देते थे ताकि सुबह किसी भी चेकिंग में ट्रक को न रोका जाए। अगर कोई ट्रक पकड़ा भी जाता, तो बिना चालान के छोड़ दिया जाता था। इस कार्रवाई के बाद यूपी एसटीएफ ने पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए आगे की जांच तेज कर दी है। अधिकारी अब यह पता लगा रहे हैं कि इस सिंडिकेट से जुड़े और कौन-कौन से अफसर और कर्मचारी हैं।

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