पटना
भाजपा के वरिष्ठ विधायक डॉ. प्रेम कुमार को निर्विरोध और सर्वसम्मति से बिहार विधानसभा का अगला अध्यक्ष चुना गया. चुनाव की औपचारिक घोषणा होते ही सदन में “हर हर महादेव” और “जय श्री राम” के नारे गूंज उठे. प्रेम कुमार गया टाउन, यानी गयाजी शहरी क्षेत्र के मतदाताओं के प्रतिनिधि चुनकर 9वीं बार भी विधानसभा पहुंचे हैं. 202 सीटों की बड़ी जीत के साथ ही उनका नाम चल निकला था. इंतजार हो रहा था कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लें और मंत्रिपरिषद् के बाकी सदस्यों का भी शपथ ग्रहण हो जाए. तभी यह हुआ और तय हो गया कि डॉ. प्रेम कुमार के सामने इस कुर्सी के लिए किसी की ओर से कोई विकल्प नहीं है.
डॉ. प्रेम कुमार ने सोमवार को नामांकन भरा. 35 विधायकों वाले महागठबंधन से किसी अन्य ने इस पद के लिए नामांकन नहीं भरा. यानी, प्रेम कुमार को निर्विरोध चुना गया. जिसके बाद सभी नेताओं ने उन्हें बधाई दी. प्रेम कुमार ने अपने संबोधन की शुरुआत गीता के श्लोक से की.उन्होंने कहा कि- आप सभी ने सर्वसहमति से मुझे चुना इसके लिए आभार. अध्यक्ष के रूप में मेरा कर्तव्य होगा कि सदन के संचालन के नियमों का पालन करते हुए सभी सदस्यों के अधिकारों का पालन हो. आवश्यकता है विचारों के विविधता के बीच संवाद को बढ़ाएं. हमें जनता की सेवा का मौका मिला है. मेरे लिए सरकार और विपक्ष दिनों समान रूप से होंगे.
कौन हैं डॉ. प्रेम कुमार
डॉ. प्रेम कुमार 35 साल से गया जिले की टाउन सीट से विधायक हैं. वह लगातार 9 बार से विधायकी जीत रहे हैं. एनडीए सरकार में कई बार मंत्री भी रहे हैं. उनकी गिनती भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में होती है. वे सुशील मोदी, नंद किशोर यादव, नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के जमाने के नेता हैं. प्रेम कुमार अति पिछड़ी जाति कहार जाती से आते हैं. 70 साल के प्रेम कुमार एलएलबी और पीएचडी कर चुके हैं. उनकी संपत्ति की बात की जाए, तो उनकी पास 13 करोड़ से अधिक की संपत्ति है. इसके अलावा उनके ऊपर 18 आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं.

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