भोपाल
भोपाल से जबलपुर के बीच 255 किमी लंबा नया ग्रीन फील्ड हाईवे बनाया जाएगा, जिसकी लागत 15 हजार करोड़ रुपए होगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण होने पर अप्रैल-मई 2026 से हाईवे निर्माण शुरू हो जाएगा। लखनादौन से रायपुर के बीच 220 किमी लंबा 4 लेन हाईस्पीड कॉरिडोर 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा, यह रायपुर विशाखापट्टनम कॉरिडोर से जुड़ेगा।
मध्यप्रदेश सीधे विशाखापट्टनम बंदरगाह से जुड़ेगा। इंदौर से भोपाल 160 किमी ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को मंजूरी दी जा रही है, जिसकी लागत 12 हजार करोड़ रुपए होगी। मध्यप्रदेश के लिए 4250 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली 174 किमी लंबी 9 सड़क परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह बात कही।
कार्यक्रम में गडकरी ने मध्यप्रदेश के लिए 60 हजार करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न सड़क परियोजनाओं की घोषणाएं भी की। इनके पूरे होने से जहां कई क्षेत्र आपस में जुड़ेंगे, वहीं यात्रा समय में भी कमी आएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि केंद्रीय मंत्री गडकरी ने महाकौशल सहित प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों के निवासियों की रोड नेटवर्क संबंधी आकांक्षा व अपेक्षा को पूर्ण किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सौगातों के लिए प्रदेशवासियों की ओर से गडकरी का आभार माना।
सबकी समृद्धि के लिए हमारी सरकार सक्रिय
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुगम संपर्क, तेज विकास, बेहतर सुरक्षा और सबकी समृद्धि सुनिश्चित करने के प्रण को पूरा करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्धता के साथ अद्यतन अधोसंरचना निर्माण के लिए निरंतर सक्रिय है।

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रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240