कुरुक्षेत्र.
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हरियाणा में लगातार दूसरे दिन शनिवार को श्रीमद्भगवद्गीता की धरा पर पहुंची सज्जन शक्ति को कर्म का महत्व का समझाया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवगद्गीता सदन में करीब 140 मिनट में संबाेधन में उन्होंने संघ के उद्देश्य और 100 वर्ष के संघर्ष के बारे में बताया।
उन्होंने प्रदेश भर से आए 500 से अधिक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों, न्यायाधीशों और शिक्षाविदों को संबोधित किया। उनके प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासा को शांत भी किया।
'संघ जैसा कोई नहीं'
उन्होंने कहा कि आज संघ अपने स्वयंसेवकों के कर्म से ही यहां तक पहुुंचा है। समाज में परिवर्तन के लिए हमें स्वयं से शुरू करना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की किसी से कोई तुलना नहीं की सकती। संघ जैसा कुछ नहीं है, अब विदेशी भी संघ की प्रणाली को समझ रहे हैं, वह भी चाहते हैं कि वह अपने देश में भी कोई ऐसा संगठन खड़ा करें।
संघ के बारे में बाहर से कोई किसी भी तरह की धारणा न बनाए। अगर संघ के बारे में जानना है तो वह संघ की शाखा में आइए। कोई रोक-टोक नहीं है और कोई फीस नहीं है। वह संघ के बारे में समझें, बारीकी से समझने के लिए तीन-चार साल लगाए। जब चाहे छोड़ दे, इसके बारे में समझने के बाद अगर कोई धारणा बनाएगा तो हमें भी इससे सुधार करने में आसानी होगी। किसी के कहने पर व्यर्थ की धारणा बनाना और जो है नहीं उस पर बात करने से कोई लाभ नहीं होने वाला।

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