बैंकॉक
थाइलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नवीराकुल ने ईंधन संकट की जिम्मेदारी लेते हुए देश से माफी मांगी है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों हाथ जोड़कर कहा कि मिस मैनेजमेंट के चलते आम लोगों को तकलीफ उठानी पड़ी, जिसका उन्हें कष्ट है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के साथ हुए अहम समझौते की भी जानकारी दी। बैंकॉक स्थित गवर्नमेंट हाउस में पश्चिम एशिया में एक महीने से जारी संघर्ष के बाद के हालात पर चर्चा करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। उन्होंने बताया कि थाईलैंड ने ईरान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत उसके तेल टैंकर अब होर्मुज से सुरक्षित गुजर सकेंगे। पीएम ने बताया कि इस समझौते से देश में ईंधन को लेकर बनी चिंता कम होगी।
मीडिया के सामने ही प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल ने थाईलैंड में ईंधन कुप्रबंधन के लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व संकट की वजह से हुई दिक्कतें सोच से ज्यादा लंबी चलीं। उन्होंने प्राइस कैपिंग के विचार का उल्लेख भी किया। 'बैंकॉक पोस्ट' के अनुसार, प्रेस के सामने वो हाथ जोड़कर खड़े हुए और कहा, "फ्यूल मैनेजमेंट से हुई गड़बड़ी के लिए मैं लोगों से माफी मांगता हूं।" अपने फैसले को सही करार देते हुए कहा कि पंपों पर प्राइस कैप खत्म करने से पड़ोसी देशों में तेल की स्मगलिंग रोकने और फ्यूल की कमी को कम करने में मदद मिलेगी।
दरअसल, बुधवार रात, थाई लोग छह-बहत (टीएचबी/थाई मुद्रा) प्रति लीटर की कीमत बढ़ने से हैरान थे। इसके बाद स्टेट ऑयल फ्यूल फंड की घोषणा के बाद गुरुवार सुबह 5 बजे नई कीमतें लागू होने से पहले पेट्रोल भरवाने की होड़ मच गई, जिससे देश भर में सर्विस स्टेशनों पर लंबी लाइनें लग गईं। अचानक हुई बढ़ोतरी को लेकर सरकार की बहुत आलोचना हुई। हालांकि ऑयल फ्यूल फंड ऑफिस ने बाद में इस तेज बढ़ोतरी को कई वजहों का नतीजा बताया, पीएम अनुतिन शनिवार तक इस फैसले पर चुप थे। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ यूएस-इजरायल संघर्ष शुरू होने के बाद पहले 15 दिनों में, सरकार ने जनता पर बोझ कम करने के लिए फ्यूल की कीमतों पर कैप लगाने की कोशिश की, यह अनुमान लगाते हुए कि युद्ध ज्यादा दिन नहीं चलेगा।
युद्ध के पहले तीन हफ्तों में ऑयल फंड ने कीमतों पर सब्सिडी देने में 20 बिलियन बहत खर्च किए, और एक बार जब रोजाना की सब्सिडी की लागत 2 बिलियन बहत तक पहुंच गई तो परेशानी शुरू हो गई। अनुतिन ने कहा, "जैसे हालात है उसमें ये सब जल्द खत्म नहीं होने वाला, इसलिए सरकार को कुछ उपायों में बदलाव करना पड़ा है, और कम आय वाले मजदूरों, किसानों और (ट्रांसपोर्ट) ऑपरेटर्स पर ध्यान देना पड़ा है।" उन्होंने बताया कि प्राइस-कैप खत्म करने का मतलब पूरी तरह से फ्लोटिंग कीमतें नहीं हैं, बल्कि सब्सिडी रेट को कम करना है—24 बहत प्रति लीटर से 16 बहत तक। यह ग्लोबल मार्केट की स्थितियों को बेहतर ढंग से दिखाएगा।
पीएम ने कहा कि 77 मिलियन लीटर रोजाना की रिफाइनिंग कैपेसिटी के साथ, थाईलैंड के पास 67 मिलियन लीटर के औसत फ्यूल कंजम्पशन को पूरा करने के लिए काफी आपूर्ति है, लेकिन हाल ही में पैनिक बाइंग ने रोजाना की डिमांड को 82 मिलियन लीटर तक बढ़ा दिया है—जो औसत से 22 फीसदी ज्यादा है। अनुतिन के मुताबिक अब हालात काबू में हैं, लेकिन जनता से अपील की गई कि वे रोज एक लीटर बचाने की कोशिश करें।

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