फरीदाबाद
केंद्र सरकार के निर्देशों के बावजूद शहर में अब तक पेट्रोल पंपों पर केरोसीन (मिट्टी तेल) की बिक्री शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की किल्लत झेल रहे लोगों, खासकर दिहाड़ी मजदूरों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि सरकारी फैसले का जमीनी स्तर पर कोई असर नजर नहीं आ रहा और जिम्मेदार अधिकारी ऊपर से आदेश नहीं आने का हवाला देकर स्थिति स्पष्ट करने से बच रहे हैं, जिससे लोग काफी परेशान है। शहर करीब 80 पेट्रोल पंप है। केंद्र सरकार के नए आदेश अनुसार केरोसीन तेल का वितरण पुराने पेट्रोल पंपों के माध्यम से किया जाना है, जहां पहले से केरोसीन तेल भंडारण के इंतजाम हैं।
पेट्रोप पंप एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार शहर में ऐसे दो पेट्रोल पंप हैं, जिन पर केरोसीन बिक्री की व्यवस्था शुरू की जानी थी, लेकिन अभी तक यह योजना कागजों से बाहर नहीं निकल सकी है। ऐसे में मजदूर वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोग वैकल्पिक ईंधन के लिए परेशान हैं।छोटे सिलेंडरों को लेकर मजदूरों की परेशानी बढ़ीशहर में रसोई गैस की कमी का सीधा असर गरीब और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है। गैस एजेंसियों पर आपूर्ति प्रभावित होने के कारण लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन दिहाड़ी मजदूरों को हो रही है, जिनकी आय सीमित है और जो महंगे सिलेंडर खरीदने में सक्षम नहीं हैं। कई इलाकों में मजदूर पांच किलो के छोटे सिलेंडर ब्लैक में भरवाकर खाना बनाने को मजबूर हैं। संजय कॉलोनी निवासी रवि सिंह ने बताया कि वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ यहां किराये पर रहते हैं और एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। पहले किसी प्रकार पांच किलो का छोटा सिलेंडर भरवा कर काम चल जाता है और 100 रुपये किलो गैस भरी जाती थी। पांच किलो गैस 10 से 15 दिन चल जाती थी। अब गैस भरने वालों ने प्रति किलो 250 से 300 रुपये दाम कर दिए है। उन्हें मजबूरी में यह विकल्प अपनाना पड़ रहा है। यदि पेट्रोल पंपों पर केरोसीन की बिक्री शुरू हो जाती, तो उनके जैसे अनेक लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।ब्लैक में घरेलू सिलेंडर तीन से चार हजार में बिक रहाशहर में प्रशासन की छापेमारी कार्रवाई के बावजूद गैस की कालाबारी जोरशोर से जारी है। सूत्रों के अनुसार गैस सिलेंडरों की कालाबाजी कर धंधा खूब फल-फूल रहा है। एक व्यक्ति ने बताया कि ब्लैक में एक सिलेंडर तीन हजार से चार हजार रुपये का मिल रहा है।अधिकांश मजदूरों के पास नहीं है गैस कनेक्शनशहर के एनआईटी, नहर पार और बल्लभगढ़ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर रहते हैं, जो आसपास के निर्माण कार्यों में लगे हैं। इनमें से अधिकांश के पास घरेलू रसोई गैस कनेक्शन तक नहीं है। ऐसे लोग अब तक छोटे सिलेंडरों या वैकल्पिक साधनों के जरिए काम चला रहे थे, लेकिन गैस की कमी और सख्ती बढ़ने से उनकी परेशानी और गहरा गई है। मजदूरों का कहना है कि अगर सस्ती दर पर केरोसीन उपलब्ध हो जाए, तो उनकी रसोई फिर से सुचारु हो सकती है।पेट्रोल पंपों पर केरोसीन बिक्री को लेकर मुख्यालय से अभी तक कोई स्पष्ट आदेश या दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। आदेश मिलते ही व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।-कविता सिंह परिहार, नियंत्रक, जिला खाद्य एवं आपूर्ति

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