भोपाल
धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक स्मृति, इन तीनों के संगम के रूप में ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026' ने भोपाल से अपनी पहली यात्रा शुरू की. रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से रवाना हुई यह विशेष तीर्थ यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि हजार वर्षों की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक चेतना की यात्रा के रूप में देखी जा रही है. मध्यप्रदेश से पहली बार रेल मार्ग के जरिए शुरू हुई इस यात्रा में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से आए श्रद्धालु शामिल हैं. सोमनाथ मंदिर, जो भारतीय इतिहास और सनातन परंपरा का सशक्त प्रतीक माना जाता है, इस यात्रा का केंद्र बिंदु है।
रानी कमलापति स्टेशन से दिखाई हरी झंडी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है. हेली सेवा के बाद अब रेल मार्ग से इस तरह की विशेष तीर्थ यात्रा श्रद्धालुओं की सुविधा और पहुंच को और आसान बनाएगी. मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मंदिर को स्वाभिमान, आस्था और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक बताते हुए इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान पर प्रतिष्ठित बताया।
गंगोत्री से गंगा सागर तक बिखर रहा आनंद : CM
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधु जिनके चरण पखारता है, मस्तक पर जिनके चंद्र देव बिराजे हैं, अक्षय स्वाभिमान के ज्योतिर्लिंग, भगवान सोमनाथ के चरणों में कोटि-कोटि वंदन. सोमनाथ का संबंध देश के स्वाभिमान के साथ है. द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण ने जब अधर्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तब पूरा समय चक्र ही बदल गया. हम सभी जानते हैं कि एक हजार साल पहले भारत को काली छाया का ग्रहण लग गया था. उस समय बाबा सोमनाथ ने इस ग्रहण को नष्ट किया था. सोमनाथ हमारे विकास का पर्याय भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा प्रारंभ हुई. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, पुल, पुलिया, सड़क, नगर, कारखाने के साथ-साथ सनातन संस्कृति को भी लेकर चल रही है. इस सनातन संस्कृति पर हमें गर्व है. प्रधानमंत्री मोदी के मन में भी सनातन धर्म के साथ सबको लेकर चलने की भावना है. यह भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. हमें अयोध्या और मथुरा में जो आनंद आता है, वही आनंद पश्चिम बंगाल के काली घाट पर आता है. आज भगवान की दया से गंगोत्री से गंगा सागर तक आनंद बिखर रहा है. लोकतंत्र की नई बयार पूरे देश को उत्साह-उमंग से भर रही है।
हमले के बाद भी लहराती रही सनातन संस्कृति की ध्वजा : मोहन यादव
सीएम डॉ. यादव ने लोगों से कहा कि इस यात्रा के जरिये आपको बाबा सोमनाथ के दर्शन का लाभ मिलेगा. मेरी ओर से सभी यात्रियों को बधाई. वहीं, पास में चार पीठों में से एक द्वारका पीठ भी है. यहां भगवान कृष्ण ने लीलाएं कर हमारे हृदय में छवि बनाई. सोमनाथ मंदिर पर दुश्मनों ने 17 बार आक्रमण किए थे. लेकिन, हमारी सनातन संस्कृति की ध्वजा लहराती रही. एक हजार साल बाद सोमनाथ का शिखर आसमान से बात कर रहा है. दुश्मन लाख चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो बाबा सोमनाथ चाहें. उन्होंने तीर्थयात्रियों से कहा कि आप बाबा सोमनाथ से आशीर्वाद लेना कि दुनिया में चारों ओर खुशहाली हो. यह सांस्कृतिक जानगरण राष्ट्रीय एकता को और सुदृढ़ करे. उन्होंने कहा कि जीवन भी एक यात्रा है. जीवन की इस यात्रा में हम आते हैं और शरीर छोड़ते हैं. लेकिन, इस बीच परमात्मा ने हमें जो मौका दिया है, इस मौके का उपयोग हम परोपकार में करें।
देवलोक बनने से बदल जाती है अर्थव्यवस्था : मुख्यमंत्री
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने धार्मिक स्थानों पर हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की है. हमारी सरकार कई देवलोक बनवा रही है. महाकाल लोक बनने के बाद आर्थिक रूप से पूरा इको-सिस्टम बदल गया. साल 2022 से पहले उज्जैन में एक वर्ष में 25-30 हजार लोग आते थे, आज रोज डेढ़ लाख लोग दर्शन करने उज्जैन आ रहे हैं. इस तरह पूरा माहौल बदल रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह के देवलोक बनने के बाद होटल वालों, ठेले वालों, ऑटो वालों, दुकान वालों के जीवन में बदलाव आता है. भारतवासी जब एक-दूसरे के क्षेत्र में जाते हैं, तो एक-दूसरे को अपनी-अपनी संस्कृति से परिचित कराते हैं. इससे आंतरिक एकता का निर्माण होता है. यही एकता एकात्मवाद में परिवर्तित होती है।
मेरी अपनी ओर से सभी तीर्थयात्रियों को बधाई
श्रद्धालुओं का बड़ा कारवां
मध्यप्रदेश से पहली बार निकल रही इस यात्रा में 1,100 श्रद्धालुओं का दल शामिल है. यह विशेष रेलगाड़ी भोपाल के साथ-साथ उज्जैन रेलवे स्टेशन से भी यात्रियों को लेकर सोमनाथ के लिए रवाना हुई. यात्रा के दौरान श्रद्धालु सोमनाथ पहुंचेकर दर्शन, पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे. साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सोमनाथ से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक कथाओं को साझा किया जाएग।
धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक जुड़ाव
सरकार और संस्कृति विभाग के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य केवल दर्शन तक सीमित नहीं है. यह पहल धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत करने का प्रयास है. रेलवे के माध्यम से सामूहिक तीर्थ यात्रा ने बुजुर्गों, परिवारों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सरल बनाया है. यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं, आवास और कार्यक्रमों का समन्वय संस्कृति विभाग द्वारा किया जा रहा है।
‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' की पृष्ठभूमि
संस्कृति संचालनालय के निदेशक एन.पी. नामदेव के अनुसार, ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का मूल उद्देश्य देशभर में भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, आस्था और ऐतिहासिक संघर्षों की स्मृति को जीवंत करना है. यह पर्व राष्ट्र की गौरवमयी विरासत के उत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीकात्मक महाकुंभ है, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करता है।
इतिहास से भविष्य तक की यात्रा
सोमनाथ मंदिर को भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता और अटूट श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है. हजार वर्षों के उतार-चढ़ाव के बावजूद इस मंदिर का पुनर्निर्माण और उसकी निरंतर परंपरा भारतीय सांस्कृतिक जीवटता को दर्शाती है. ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा' इसी भाव को लेकर आगे बढ़ रही है ताकि श्रद्धालु इतिहास से जुड़ें और भविष्य के लिए सांस्कृतिक गर्व को संजो सकें।
11 मई को होगा समापन
यह यात्रा 11 मई, 2026 को संपन्न होगी, जब श्रद्धालु सोमनाथ महादेव के दर्शन कर लौटेंगे. संस्कृति विभाग के अनुसार, यात्रा का समापन केवल वापसी नहीं, बल्कि श्रद्धा, स्मृति और स्वाभिमान के भाव के साथ होगा. आयोजकों को उम्मीद है कि यह पहल प्रदेश की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करेगी, और श्रद्धालुओं के मन में आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना का नया संचार करेगी।

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